सीतापुर। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत भले ही प्रशासन गरीबों को आवास दिलाने की बात कहता रहा हो, लेकिन बड़ा जटहा गांव में सभी दावों की पाेल ही खुल गई।
हादसे में अपनी जान गंवाने वाले कई परिवार ऐसे थे, जिनको आवास की जरूरत थी। उन्होंने कई बार इसके लिए आवेदन भी किया था लेकिन न जाने किन कारणों से उन्हें आवास का लाभ नहीं मिल सका। हादसे में अपनी पत्नी और बेटे को खोने के साथ अपने पैर गवां चुके रामदास के घर का आलम यह था कि कच्ची दीवार पर घर के बाहर टिन शेड पड़ा हुआ था।
घर के अंदर एक पुराना छप्पर पड़ा था। जिसमें पूरा परिवार रहता था। पूछने पर उसके परिजनों ने बताया कि कई बार उन्होंने आवेदन किया था, लेकिन सूची में नाम आने के बाद भी उनका नाम काट दिया गया।
प्रमोद के घर का भी यही हाल था। जरा सी जगह में ही एक फूस की झोपड़ी में पूरा परिवार अपना जीवन व्यतीत करा था। रूपेश के घर भी हाल ऐसा ही था। लोगों ने बताया कि जिम्मेदारों ने सर्वे आदि करने के बाद भी नाम काट दिया था। हालांकि डीएम अनुज सिंह का कहना है कि सर्वे कराते हुए इन सभी पीड़ितों को आवास योजना का लाभ दिलाया जाएगा।