सीतापुर। जिला पंचायत सदस्यों के आरक्षण ने कई प्रत्याशियों का गणित बिगाड़ दिया तो कई की चुनाव लड़ने की हसरत अधूरी रह गई। जिले की आठ सीटें तीन पंचवर्षीय योजनाओं के बावजूद इस बार चौथी पंचवर्षीय में सामान्य वर्ग की झोली में जाने से कुछ दूर ही रह गई हैं। यह सीटें ऐसी थी जो सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व पाने को तरस रही हैं। इन सीटों को लोग सामान्य वर्ग की होने के कयास लगा रहे थे। वे इन सीटों की दावेदारी भी कर रहे थे लेकिन आरक्षण के बाद लोगों को मायूसी हाथ लगी। यह सभी सीटें सामान्य को छोड़कर अन्य वर्गों में चली गई है। इससे अब यहां से लड़ने का सपना देख रहे लोग आस पड़ोस की सीटों पर किस्मत अजमाने की कोशिश में जुट गए हैं।
जिले में 79 जिला पंचायत सदस्य की सीटें है। बुधवार को इनका आरक्षण जारी हो गया है। आरक्षण से पहले ही प्रत्याशी अपनी मनचाही सीट पर दावेदारी कर रहे थे। इसमें कुछ को अपने वर्ग की सीट मिल गई है तो कई इससे अछूते रहे गए हैं। उनकी चुनाव लड़ने से पहले ही सीटों के गणित ने तगड़ा झटका दे दिया है। अगर जिला पंचायत की बिसवां विकासखंड की वार्ड संख्या 64 की बात की जाए तो यह सीट 2005 से चुनावी अस्तित्व में आई। पहली बार यह एससी के लिए आरक्षित हुई।
जबकि दूसरी बार ओबीसी, तीसरी बार महिला व इस बार एससी महिला के रिजर्व कर दी गई है। ऐसे में तीन बार आरक्षण में जाने के बाद लोग इसको सामान्य होने के कयास लगा रहे थे। लेकिन उनको आरक्षण ने जोर का झटका दिया है। इसी प्रकार महमूदाबाद इलाके के वार्ड संख्या 67 भी कभी सामान्य नहीं हो सकी है। 2005 में पहली बार एससी, दूसरी बार 2010 में ओबीसी महिला, 2015 में ओबीसी और इस बार फिर से एससी के कोटे में चली गई है।
वार्ड संख्या 68 भी 2005 में ओबीसी महिला, एससी महिला, ओबीसी महिला और इस बार एससी कोटे में चली गई। रामपुर मथुरा/महमूदाबाद की वार्ड संख्या 69 भी 2005 में ओबीसी महिला, एससी महिला, ओबीसी महिला और इस बार एससी को मिली है। रामपुर मथुरा की वार्ड संख्या 70 2005 में ओबीसी, 2010 में एससी महिला, ओबीसी महिला और इस बार महिला वर्ग में आरक्षित की गई है।
रामपुर मथुरा के वार्ड संख्या 73, 2005 में एससी, उसके बाद ओबीसी महिला, फिर ओबीसी महिला और इस बार महिला वर्ग को मिली है।
रेउसा का वार्ड संख्या 74 में 2005 में ओबीसी महिला, एससी महिला व ओबीसी महिला को सीट मिली थी। इस बार यह महिला के खाते में सीट चली गई है। अगर बात की जाए रेउसा के वार्ड संख्या 75 में 2005 में ओबीसी महिला, एससी महिला, ओबीसी महिला व इस बार महिला वर्ग को मिली है। इससे इन सीटों पर सामान्य वर्ग से चुनाव लड़ने का सपना देख रहे प्रत्याशियों को खाली हाथ रहना पड़ेगा।
कभी सामान्य वर्ग का नहीं हो सका रामपुर मथुरा ब्लॉक
अगर ब्लॉक प्रमुख के आरक्षण की बात की जाए तो रामपुर मथुरा विकासखंड ऐसा है, जहां कभी भी सामान्य वर्ग को प्रतिनिधित्व नहीं मिल सका है। 1995 से आरक्षण की प्रक्रिया शुरू हुई। इस आरक्षण के तहत 1995 में ओबीसी महिला, 2000 में ओबीसी महिला, 2005 में ओबीसी, 2010 में महिला, 2015 में एससी महिला और इस बार फिर से ओबीसी के कोटे में चली गई है। जबकि 1995 के आरक्षण के बाद जिले में रामपुर मथुरा विकासखंड को छोडक़र अन्य सभी 18 ब्लॉक कभी न कभी अनारक्षित हो चुके है। लेकिन इस ब्लॉक की किस्मत 2021 में भी नहीं बदल सकी है।