कमलापुर/सीतापुर। ग्रामीण स्तर पर खेलों को बढ़ावा देने के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर खेल मैदान बनवाए जाने की योजना चलाई जा रही है। लेकिन सरकर की मंशा पर जिम्मेदारों की लापरवाही भारी पड़ रही है।
कसमंडा क्षेत्र में हालत यह है कि ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे खेल मैदान के अभाव में खेतों और गलियों में खेलने को मजबूर हैं। ऐसे में इनकी प्रतिभा उभरने की बजाए गांव में ही दम तोड़ दे रही हैं। विकास खंड कसमंडा की 78 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत खेल मैदान बनाए जाने हैं। अब तक सिर्फ बलोइया, दहावा, खुर्दा व कुरसंडा में ही खेल मैदान बनाए गए हैं। ये चारों खेल मैदान कागजों पर जरूर बनकर तैयार कर दिए गए हैं, पर धरातल पर यहां कोई सुविधा नहीं है।
कागज पर मैदान तैयार, हकीकत में सिर्फ लगाया गेट
कुरसंडा में वर्ष 2022-23 में 1.76 लाख से खेल मैदान बनाया गया है। यहां खेल मैदान के नाम पर सिर्फ गेट बना है। रेसिंग ट्रैक, बालीवॉल और बैडमिंटन कोर्ट नहीं है। न तो बेंच बनवाई गई है, न पेयजल का कोई इंतजाम है। हल्की बारिश में मैदान में पानी भर जाता है। बलोइया में 3.99 लाख रुपये, दहावा में 3.90 लाख रुपये और खुर्दा में 2.05 लाख रुपये की लागत से बनाए गए खेल मैदानों में भी सुविधाएं नदारद हैं। यहां न बाउंड्रीवॉल है और न किसी भी खेल की सुविधा।
युवाओं के हाथ लगी निराशा
कुरसंडा गांव के सर्वेश का कहना है कि खेल मैदान का निर्माण होने पर आस जगी थी कि खिलाड़ियों को हुनर निखारने का स्थान मिलेगा। खेल मैदान व संसाधन मिलने पर प्रतिभा और उभरेगी, लेकिन खेल मैदान को देखकर निराशा ही हाथ लगी। दहावा के राजेश ने कहा कि खेल मैदान के निर्माण में मानकों की अनदेखी की गई है। युवाओं के लिए खेल मैदान महज छलावा साबित हो रहे हैं।
कमीशनबाजी के फेर में फंसे खेल मैदान
अधिकतर प्रधान खेल मैदान बनवाने में रुचि नहीं ले रहे हैं। ग्राम पंचायत अंधना और संदना के इस्टीमेट स्वीकृत हैं, फिर भी निर्माण नहीं कराया गया है। उधर, प्रधानों का कहना है कि जितने का इस्टीमेट बना है उसमें काम हो पाना मुश्किल है। ऊपर से विभाग में कमीशन भी देना पड़ता है। ऐसे में मानक के अनुरूप निर्माण कराना संभव नहीं है।
प्रधान नहीं ले रहे रुचि
खेल मैदान के निर्माण में प्रधान रुचि नहीं ले रहे हैं। दो ग्राम पंचायतों का इस्टीमेट स्वीकृत होने पर भी प्रधान निर्माण नहीं करा रहे हैं। जो खेल मैदान बनवाए गए हैं, वहां यदि सुविधाओं की कमी है तो जांच की जाएगी।
- चंद्रप्रकाश, एपीओ मनरेगा