सीतापुर। यूपी बोर्ड के नतीजों में प्रदेश व जिले की मेरिट में निजी कॉलेजों का दबदबा दिखाई दिया। 10वीं व 12वीं में 38 विद्यार्थियों ने जिले की टॉप टेन सूची में जगह बनाई। ये सभी विद्यार्थी निजी कॉलेजों के हैं। सरकारी विद्यालय का कोई भी विद्यार्थी सूची में जगह नहीं बना सका।
हाईस्कूल की टॉप टेन सूची में 21 इंटरमीडिएट की सूची में 17 विद्यार्थी जगह बनाने में सफल रहे। जिले में 54 राजकीय इंटर कॉलेज, 54 अशासकीय इंटर कॉलेज व 403 निजी कॉलेज हैं। सरकारी व सहायता प्राप्त कॉलेजों पर सरकार हर साल भारी भरकम रकम शिक्षकों की तनख्वाह पर खर्च कर रही है। इसके बावजूद यहां के विद्यार्थियों की प्रतिभा निखर नहीं पा रही है।
संसाधनों की है कमी
सरकारी कॉलेज में अब तो बहुत ही योग्य शिक्षक आ रहे हैं। वह विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा पास करके नौकरी हासिल कर रहे हैं, लेकिन इन कॉलेजों में बजट की कमी के चलते संसाधन उपलब्ध नहीं हो पाते हैं। वहीं, प्राइवेट कॉलेजों में हाईटेक सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। अब कॉलेजों में तकनीक का विशेष सहारा लिया जाता है। प्राइवेट के पास बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, सुसज्जित लाइब्रेरी उपलब्ध होती है। इसी वजह से प्राइवेट कॉलेज आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन नई शिक्षा नीति में तमाम बातों का जिक्र हुआ है। इससे उम्मीद है कि आने वाले समय में सरकारी विद्यालय भी बेहतर विकल्प होंगे। -डॉ. रजनीकांत श्रीवास्तव, शिक्षाविद्