डेढ़ माह की हड़ताल के बाद मंगलवार को सराफा व्यापारियों ने अपनी दुकानें खोलीं। इससे आभूषणों की दुकानों में चमक देखने को मिली। हालांकि सराफा व्यवसायियों ने अपनी दुकानें तो खोल दी हैं, लेकिन उनके संगठन ने यह निर्णय क्यों लिया, सरकार ने उनकी मांग मानी या नहीं मानी, इस बात से व्यापारी अभी तक अनभिज्ञ हैं।
केंद्र सरकार द्वारा सोने-चांदी के व्यवसाय पर एक्साइज ड्यूटी लगाने के विरोध में स्वर्णकार 7 मार्च से हड़ताल पर चले गए थे। 7 मार्च से 11 अप्रैल तक करीब डेढ़ माह सराफा व्यवसायी हड़ताल पर रहे। इससे करीब 20 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है।
उधर, मंगलवार जिला मुख्यालय पर लालबाग बाजार, बिसवां, तंबौर, लहरपुर, मिश्रिख, महोली, सिधौली, महमूदाबाद, रेउसा, हरगांव आदि कस्बों में स्वर्णकार व्यवसायियों ने अपनी दुकानें खोलीं। पहले दिन इन दुकानों पर बिक्री बेहद कम रही। सराफा कारोबारी प्रशांत गुप्ता, हिमांशु गुप्ता, रिंकू मिश्रा आदि ने बताया कि करीब डेढ़ माह की हड़ताल के बाद दुकानें खुली हैं, इस वजह से ग्राहकों को पता नहीं चल सका। यही वजह है कि पहले दिन दुकानदारी काफी कम हुई है।
सर्राफ स्वर्णकार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सत्य प्रकाश रस्तोगी के मुताबिक जिले के एक हजार दुकानदार हड़ताल पर थे। मंगलवार दोपहर दुकानदारों ने अपनी दुकानें खोलना शुरू कर दिया। एसोसिएशन के पदाधिकारियों विपिन रस्तोगी, संजय मिश्रा ने बताया कि उन्हें दिल्ली से हड़ताल समाप्त करने के निर्देश मिले हैं। जिसके बाद दुकानें खोली जा रही हैं।
जिलाध्यक्ष ने बताया कि दिल्ली में संगठन के पदाधिकारियों से सरकार के बीच क्या वार्ता हुई, सरकार ने मांगे मानी या नहीं यह स्पष्ट नहीं है। संगठन के अगले निर्देश का इंतजार किया जा रहा है।