जिले के गांजर में बाढ़ग्रस्त परिवारों की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है। थानगांव में गुरुवार को बाढ़ से उफनाए नाले में डूबने से एक बालिका की मौत हो गई। वहीं मारू बेहड़ में लोग घरों की छतों व गांव के ऊंचे स्थानों पर कैद होकर रह गए हैं। घरों में खाने को राशन नहीं बचा है। चूल्हे ठंडे पड़े हैं। रामपुर मथुरा में भी हालात काफी खराब हैं।
थानगांव के ईंटगांव के आसपास खेत बाढ़ के पानी की चपेट में है। गांव के निकट मौजूद सुतहिया नाला उफना रहा है। गुरुवार दोपहर गांव के इकलाख की पुत्री अकीलुन (10) बकरियों को चराने गई थी। खेतों में पानी होने के कारण वह नाले के बारे में नहीं जान सकी और नाने में गिर गई। तैरना न आने की वजह से वह डूब गई। शोर सुनकर ग्रामीणों ने नाले में छलांग लगाई।
करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद उसे बाहर निकाला लेकिन तब तक डूबने से उसकी मौत हो चुकी थी। उधर, मारूबेहड़ में गुरुवार को बाढ़ग्रस्त इलाके का पानी ठहर सा गया था। लेकिन शाम होते ही जलस्तर में तेजी से इजाफा होने लगा। सबसे दयनीय हालत क्षेत्र के पचीसा व कोनी गांवों की है।
क्षेत्र के निर्मलपुरवा, दुर्गा पुरवा, राम लाल पुरवा, जैताहिया आदि गांव बाढ़ की चपेट में हैं। सैकड़ों बीघा फसलें जलमग्न हैं। बुधवार को क्षेत्र के राव्मलाल पुरवा, गोडिय़न पुरवा, निर्मल पुरवा आदि प्रमुख मार्गों पर बाढ़ का पानी मामूली रूप से घटा था। गुरुवार की शाम होते ही बाढ़ का पानी फिर बढ़ने लगा।
इससे तमाम संपर्क मार्ग एक बार फिर से बाढ़ की चपेट में आ गए। लोगों का कहना है घाघरा व शारदा बैराजों से छोड़ा गया पानी गुरुवार शाम इस क्षेत्र में पहुंचा है। जिसकी वजह से जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। उधर, रामपुर मथुरा क्षेत्र के 34 गांवों में भी बाढ़ आई हुई है। पूरे जिले में करीब 92 गांव चपेट में हैं।
प्रशासन मदद के दावे कर रहा है, लेकिन यह सब झूठा नजर आ रहा है। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि उन्हें तो प्रशासन की मदद मिली ही नहीं है। उधर, घाघरा व शारदा बैराज से 247053 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इस पानी से बाढ़ ग्रस्त इलाके के जलस्तर में और इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है। जिसकी वजह से हाल फिलहाल स्थिति सुधरते नजर नहीं आ रही है।