गांजर इलाके में बाढ़ से हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। रविवार रात घाघरा नदी ने दुर्गा पुरवा के पास आधी सड़क को काट दी है। इससे गांव के लोग भयभीत हैं। दुर्गा पुरवा व कोनी गांव के लोगों का आवागमन ठप हो गया है। ट्रैक्टर-ट्रॉली व दो पहिया वाहन नहीं निकल पा रहे हैं।
दूसरी तरफ, घाघरा नदी के बीच टापू पर बसे पचीसा गांव पर भी घाघरा का कहर टूट रहा है। अब तक नदी टापू पर करीब डेढ़ किलोमीटर लंबाई व एक किलोमीटर चौड़ाई तक कटान कर चुकी है। करीब पांच दिनों में 70 परिवारों ने आशियानें खो दिए हैं। शारदा व घाघरा बैराजों से सोमवार को सवा दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
इससे नदी के जलस्तर में इजाफा होने की आशंका है। गांजर में करीब 100 गांव घाघरा नदी की बाढ़ की चपेट में हैं। दुर्गा पुरवा के निकट नदी आधी सड़क को निगल गई थी। प्रशासन ने जैसे-तैसे कटान वाले स्थान को भरा। अब रविवार रात एक बार फिर से नदी ने करीब 100 मीटर लंबाई तक सड़क के आधे हिस्से को निगल लिया है।
इससे दुर्गा पुरवा व कोनी गांव के प्रमुख मार्ग पर संकट मडंराने लगा है। सड़क कटने से कोनी व दुर्गा पुरवा का आवागमन ठप हो गया है। ग्रामीण ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से अपना सामान ढो रहे थे, अब सड़क कटने से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का निकलना बंद हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही ठोस उपाय नहीं किए गए तो, पूरी सड़क कटकर नदी में समा जाएगी।
इससे दुर्गा पुरवा, कोनी व निर्मल पुरवा गांव के कटान पीड़ितों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट जाएगा। इस क्षेत्र के ग्रामीण सड़क का कटान देखकर भयभीत हैं। उधर घाघरा नदी के बीच टापू पर बसे पचीसा गांव में नदी तेजी से कटान कर रही है। कटान से टापू पर बसे 70 परिवार बेघर हो चुके हैं।
गांव के पुत्तीलाल, हरेराम, खेलावन, तिलकू आदि का कहना है कि कटान अगर इसी तरह से होती रही तो दो चार दिन में टापू का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। सरकारी नाव यहां पर नजर नहीं आ रही है। सोमवार को नदी के पानी में फिर से उफान देखा गया है।
बताया जा रहा है कि बैराजों से छोड़े गए पानी की वजह से नदी उफना रही है। सोमवार को शारदा व घाघरा बैराज से करीब 229949 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी इस क्षेत्र में बाढ़ पीड़ितों के लिए मुसीबत बढ़ाएगा। रामपुर मथुरा क्षेत्र में भी घाघरा नदी के जलस्तर में इजाफा देखा गया है। जिसकी वजह से बाढ़ का दंश झेल चुके ग्रामीण दहशत में हैं।
बाढ़ व कटान के कारण करीब 300 परिवार बेघर हो गए हैं। ये परिवार सिसैया बाजार, श्रीराम पुरवा, चंद्रभाल पुरवा, निर्मल पुरवा तथा पचीसा गांवों के हैं। पीड़ित परिवारों ने जहां तहां डेरा डाल रखा है। निर्मल पुरवा के पीड़ित दुर्गा पुरवा में पड़े हैं।
जबकि अन्य जगहों के पीड़ित सड़कों पर आ गए हैं। गांजर इलाके में पूरे क्षेत्र के बेघर होने वालों की संख्या 500 का आंकड़ा पार कर रही है। प्रशासन इन पीड़ितों को जल्द ही आवास योग्य भूमि उपलब्ध कराने का आश्वासन दे रहा है।
निर्मल पुरवा गांव पूरी तरह से तबाह हो चुका है, यहां पर महज एक शिव मंदिर ही बचा था। ये ही ऐसा मंदिर था, जिसमें गांव के लोग माथा टेक कर सुख शांति की कामना करते थे। बर्बादी का सैलाब इस कदर आया कि पूरा गांव तबाह हो गया। अब शिव मंदिर पर घाघरा की कटान का खतरा मंडरा रहा है। नदी का पानी मंदिर के करीब आ गया है।
बाढ़ गांजर के रेउसा व रामपुर मथुरा इलाके में कहर बरपा रही है। सबसे बड़ा हिस्सा रेउसा क्षेत्र का है, जहां बाढ़ में सैकड़ों परिवार फंसे हुए हैं। इन परिवारों के सामने भोजन का संकट आ गया है। कई घरों में राशन खत्म हो चुका है। वहीं बाढ़ व कटान की मुसीबत न टलने के कारण समस्या बढ़ती जा रही है।