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चुनावी पिच पर अर्द्धशतक लगाना नहीं आसान

Mon, 16 Jan 2017 10:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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33 फीसदी वोट पाकर बने विधायक
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मिश्रिख विधानसभा सीट पर वर्ष 2012 में कुल 1,84,449 मत पड़े थे। इनमें से करीब 33 फीसदी (61331) मत पाकर सपा के रामपाल राजवंशी ने जीत दर्ज की थी। जबकि रनर रहे बसपा के मनीष कुमार रावत ने भी 32 फीसदी (59807) वोट हासिल किए थे। 

29 फीसदी मतों से ही कुर्सी हथियाई
सदर विधानसभा सीट पर वर्ष 2012 के चुनाव में कुल 1,96,683 मत पड़े थे। सपा के राधेश्याम जायसवाल ने करीब 29 फीसदी (58370) मत हासिल कर कुर्सी पर कब्जा जमा लिया। वहीं रनर रहे बसपा के मो. अयूब ने भी 24 फीसदी (48072) मत पाए थे। 
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36 फीसदी वोट पाकर हुए थे निर्वाचित
सिधौली विधानसभा सीट पर वर्ष 2012 के चुनाव में कुल 2,01,145 मत पड़े थे। इनमें से करीब 36 फीसदी (73714) वोट पाकर सपा के मनीष रावत विधायक निर्वाचित हुए थे। दूसरे नंबर पर रहे बसपा के हरगोविंद भार्गव को 33 फीसदी (67083) वोट मिले थे। 

जो सियासत के खेल में माहिर हैं। चुनावी पिच पर धुआंधार बैटिंग से विरोधी खेमे को चित करने की कूवत रखते हैं, उनके लिए भी वोटिंग की बैटिंग में अर्द्धशतक लगाना आसान नहीं है। ये पिछले विधानसभा चुनाव के आंकड़े बोल रहे हैं। फतह हासिल करने वाले ‘माननीय‘ तक वोटिंग की बैटिंग में अर्द्ध शतक से चूक गए।

किसी ने 30 फीसदी वोट पाकर जीत दर्ज कर ली, तो कोई 33 फीसदी मत हासिल कर विधायक बन गया। किसी भी सीट पर कोई विजेता अर्द्ध शतकीय पारी नहीं खेल सका। जिले में सीतापुर, महोली, हरगांव, लहरपुर, सिधौली, महमूदाबाद, मिश्रिख, बिसवां और सेवता विधानसभा सीटें हैं।
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साल 2012 के चुनावी नतीजों पर निगाह डालें तो जीत दर्ज करने वाला कोई भी विधायक अपने क्षेत्र में कुल पड़े मतों का 50 प्रतिशत हासिल नहीं कर पाया है। जीत का परचम लहराने वाले दिग्गज भी 29 से 46 फीसदी वोटों तक सिमटकर रह गए। 50 फीसदी वोट के आंकड़े को कोई नहीं छू सका। वहीं रनर रहे सियासी खिलाड़ियों ने महज तीन से 10 फीसदी के अंतराल से शिकस्त खाकर अपनी धमाकेदार पारी का लोहा मनवा दिया। 
 
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