सीतापुर। पीसीएफ के परिवहन ठेकों में चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए नियम कानून दर किनार हैं। अफसरों ने पहले जिस अनुभव प्रमाण पत्र को फर्जी बताया बाद में उसी को सही मानकर ठेकेदार फर्म को उठान कार्य दे दिया। कुछ समय बाद में किसी दूसरे चहेते के लिए फर्म से फिर काम छीना लिया गया। मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो अब गर्दन बचाने के लिए अफसर अनुभव प्रमाणपत्र पर नोटिस जारी कर सवाल उठा रहे हैं।
विभिन्न क्रय एजेंसियों की तरह पीसीएफ भी सरकार के लिए धान खरीदती है। धान को क्रय केंद्र से राइस मिल तक पहुंचाने के लिए परिवहन का ठेका उठता हैं। जिले में पीसीएफ के कुल 65 क्रय केंद्र हैं। इन केंद्रों में उठान का धान उठाने के लिए परिवहन ठेकों की टेंडर प्रक्रिया हुई थी।
19 सितंबर को मेसर्स प्रीती कंस्ट्रक्शन के ठेका आवेदन को जिम्मेदारों ने अनुभव प्रमाण पत्र अमान्य बताते हुए ठेका देने की प्रक्रिया से बाहर कर दिया था। इसमें एक अनुभव प्रमाण पत्र सही था, लेकिन विभागीय अफसरों ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
मामले के तूल पकड़ने के बाद अफसरों ने अपने को बचाने के लिए 30 सितंबर को इसी फर्म को दस क्रय केंद्रों के परिवहन का ठेका दे दिया और फर्म ने उठान कार्य भी शुरू कर दिया। एक माह बाद दो नवंबर को फर्म को अचानक कार्य करने से रोक दिया गया।
28 अक्टूबर की तारीख में जारी इस आदेश में फर्म का ठेका निरस्त करने का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। इस पर संबंधित फर्म ने हाईकोर्ट में गुहार लगाई। कोर्ट के निर्देश पर 18 नवंबर को पुन: उक्त फर्म को उठान कार्य करने का आदेश देने के बाद 23 नवंबर को पुन: एक नोटिस जारी कर फर्म द्वारा प्रस्तुत अनुभव प्रमाण पत्र पर सवाल खड़ा कर दिया है।
पूरे मामले से मेरा कोई लेना देना नहीं है। क्षेत्रीय प्रबंधक के स्तर से पूरी कार्यवाई हुई है। पहले संबंधित फर्म को काम नहीं दिया गया था, बाद में ठेका दिया गया। क्षेत्रीय प्रबंधक ही ज्यादा बता सकते हैं।
अतुल चौधरी जिला प्रबंधक,पीसीएफ