सीतापुर। जिले में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के टेंडर आवंटन में वित्तीय बोली में क्वालीफाई फर्म के मालिक ने तथ्य छिपाकर अपना चरित्र प्रमाणपत्र जारी करवाया था। शुक्रवार को अमर उजाला में प्रकाशित संवाद न्यूज एजेंसी की खबर का संज्ञान लेकर प्रमाणपत्र की जांच की गई।
गोंडा जिला प्रशासन की जांच में प्रमाणपत्र गलत आख्या के आधार पर निर्गत मिला। इस पर प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया गया। डीएम गोंडा ने गलत आख्या देने के दोषी पुलिसकर्मियों व आवेदक पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री कार्यालय से भी जांच के आदेश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत कन्याओं को दी जाने वाली उपहार सामग्री की आपूर्ति के लिए जेम पोर्टल पर टेंडर निकाला गया था। इसमें ऐसी शर्तें रखी गईं, जो अन्य जनपदों में लागू नहीं हैं। इस टेंडर में जिला समाज कल्याण अधिकारी सीतापुर के कार्यालय से जारी निविदा शर्तों में बिंदु संख्या 7 पर डीएम द्वारा निर्गत वैध चरित्र प्रमाणपत्र जमा करने की शर्त का उल्लेख किया गया था।
वित्तीय बोली में एल-1 रैंक की एक फर्म क्वालीफाई हुई। इस फर्म के मालिक ने जो चरित्र प्रमाणपत्र टेंडर हासिल करने के लिए लगाया, उसमें तथ्यों को छिपाया गया। मालिक पर गोंडा जनपद के मोतीगंज थाने में 15 मई 2021 को पांच गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी।
इस मामले में विवेचक ने 10 जून 2021 को न्यायालय में चार्जशीट भेजी थी। इसमें सभी आरोपों की पुष्टि हुई। इसके बावजूद गोंडा जनपद से मैन्युल चरित्र प्रमाणपत्र जारी कराया गया, जिसमें इस मुकदमे का जिक्र नहीं था।
खबरों के प्रकाशन के बाद डीएम गोंडा ने चरित्र प्रमाणपत्र की जांच करवाई। पता चला कि एसपी कार्यालय गोंडा के डीसीआरबी निरीक्षक के हस्ताक्षर से भेजी गई आख्या के आधार पर यह प्रमाणपत्र बनाया गया था। इसके बाद डीएम गोंडा ने प्रमाणपत्र निर्गत करने के दोषी उपनिरीक्षक अखिलेश पांडेय व तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक मोतीगंज के विरुद्ध कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।