मास्टरबाग। कागजों में जिस प्राथमिक विद्यालय और ग्राम पंचायत सदस्य का उल्लेख किया गया, असल में उनका अस्तित्व ही नहीं है। फर्जी बैठक व प्रस्ताव का यह हैरान करने वाला मामला बिसवां ब्लॉक के निपनियामाफी गांव का है। शिकायत पर सहायक विकास अधिकारी जांच करने गांव पहुंचे तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। बिसवां बीडीओ ने जांच आख्या जिलाधिकारी को भेज दी है।
बिसवां ब्लॉक की ग्राम पंचायत निपनियामाफी निवासी अत्यदीप रावत ने आरआरसी सेंटर का निर्माण फर्जी बैठक व प्रस्ताव से कराने का आरोप लगाते हुए जनसुनवाई पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज कराई थी। डीएम डॉ. राजा गणपति आर ने बीडीओ बिसवां को मामले की जांच के निर्देश दिए। बिसवां के सहायक विकास अधिकारी पंचायत राजेश श्रीवास्तव जांच करने गांव पहुंचे तो वह भी हैरान रह गए। दरअसल, 27 जून को भूमि प्रबंधन समिति की बैठक प्राथमिक विद्यालय निपनियामाफी में कराया जाना दर्शाया गया है। स्थलीय जांच में पाया गया कि ग्राम पंचायत निपनियामाफी में कोई प्राथमिक विद्यालय ही नहीं है। प्रस्ताव में कांति देवी को पंचायत सदस्य दर्शाया गया है। जबकि उपलब्ध ग्राम पंचायत सदस्यों की सूची में कांति देवी नामक कोई सदस्य ही नहीं है। हालांकि, आंगनबाड़ी के लिए प्रस्तावित गाटा संख्या 194 क्षेत्रफल 0.0610 हेक्टेयर पर आरआरसी सेंटर बनाए जाने को लेकर जांच आख्या में कहा गया है कि प्रस्ताव होने से कोई भी भूमि आरक्षित नहीं होती है। जांच आख्या में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि शिकायतकर्ता की उपरोक्त दो बिंदुओं पर की गई शिकायत सही है। इसके लिए निपनियामाफी के पूर्व प्रधान व तत्कालीन लेखपाल उत्तरदायी हैं।
कारण बताओ नोटिस जारी
निपनियामाफी में फर्जी बैठक व प्रस्ताव के मामले की जांच कर ली गई है। पूर्व प्रधान/प्रशासक को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा गया है। जवाब मिलने पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। तत्कालीन लेखपाल पर कार्रवाई के लिए एसडीएम को पत्र भेजा गया है।
धनंजय सिंह, बीडीओ बिसवां