रेउसा विकास खंड क्षेत्र में एक व्यक्ति ने फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर प्रधानी हथिया ली। एक शिकायत के आधार पर प्रशासन के अधिकारियों ने जांच की और उसका जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया। जांच टीम के निर्णय के बाद अब प्रधान पर कार्रवाई की तलवार लटकने लगी है।
रेउसा के ग्राम ईंटगांव निवासी अरुण कुमार मौर्य ने ग्राम प्रधान बलजीत सिंह के खिलाफ 2015 में प्रशासन को प्रार्थना पत्र दिया था। जिसमें आरोप लगाया था कि 2015 में बलजीत ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र दिखाकर प्रधानी पद हथिया लिया था।
डीएम ने मामले में जांच के आदेश दिए। 25 अप्रैल 2016 को एसडीएम बिसवां ने जांच में आरोप सही पाए जाने पर बलजीत का जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया था। जिसके बाद बलजीत मामले को लेकर हाईकोर्ट चला गया था। हाईकोर्ट ने समिति बनाकर जाति प्रमाणपत्र की जांच के लिए जिला प्रशासन को आदेश दिया था।
जिस पर डीएम की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया। 18 अप्रैल समिति की जांच में पाया गया कि बलजीत मूलरूप से पंजाब के अमृतसर जिले के तहसील पट्टी ब्लाक रैया ग्राम चीनेबाद का निवासी है। बलजीत सामान्य जाति का है।
जबकि बिसवां तहसील से जो जाति प्रमाणपत्र जारी हुआ था, उसमें पिछड़ी जाति का उल्लेख था। समिति ने माना कि बलजीत ने साक्ष्यों को छिपाकर पिछड़ी जाति का प्रमाण पत्र हासिल किया है। शिकायत सही मिलने पर उसका प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया।
जिला पिछड़ा वर्ग अधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि बलजीत सिंह का जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया है। अब बलजीत की ग्राम प्रधानी पर भी संकट आ सकता है। उस पर जालसाजी की कार्रवाई की तलवार लटकने लगी है। हालांकि अधिकारी इस संबंध में स्पष्ट रूप से बोलने को तैयार नहीं हैं। अधिकारियों का कहना है कि कानूनी कार्रवाई चल रही है।