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पंचतत्व में विलीन हुए पूर्व सांसद शारदानंद

Mon, 10 Jul 2017 11:04 PM IST
सीतापुर
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शारदानंद दीक्षित (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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भारतीय जनसंघ के पूर्व सदस्य शारदानंद दीक्षित उर्फ काका का रविवार रात को पैतृक गांव बंभौरा में देहावसान हो गया। वह 98 वर्ष के थे। दीक्षित काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे। निधन पर शोक की लहर दौड़ गई। उनके अंतिम संस्कार में विभिन्न राजनीतिक दलों के दिग्गजों समेत गणमान्य नागरिकों का जमावड़ा लगा रहा।
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सोमवार को उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए उनका अंतिम संस्कार गांव में ही पंत इंटर कॉलेज के पीछे बाग में तालाब के किनारे किया गया। उनके पुत्र पूर्णानंद दीक्षित ने मुखाग्नि दी। उनके अंतिम संस्कार में पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री रामलाल राही, धौरहरा सांसद रेखा वर्मा, पूर्व सासंद जनार्दन मिश्र, महोली विधायक शशांक त्रिवेदी, पूर्व एमएलसी भरत त्रिपाठी समेत भाजपा जिला संगठन के तमाम पदाधिकारी सहित हजारों की संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शनों को मौजूद थे। उधर, प्रशासन की ओर से एसडीएम भी मौजूद थे। ग्रामीणों ने बम्भौरा का नाम बदल कर उनके नाम पर शारदानंदपुरम रखने की मांग उठाई।

अटल, आडवाणी और मधोक के निकट सहयोगी रहे शारदानंद : परिवार, गांव और जिले भर के राजनीतिक कार्यकर्ताओं में काका संबोधन से पहचान रखने वाले शारदानंद दीक्षित 1962 में भारतीय जनसंघ प्रत्याशी के रूप में भारी बहुमत से पहली बार विधायक चुने गए।
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उत्तर प्रदेश की विधानसभा में उन्होंने सीतापुर जिले के तत्कालीन हरगांव विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। बाद में वर्ष 1967 के लोकसभा चुनाव पं. दीनदयाल उपाध्याय ने अचानक नामांकन पत्र प्रस्तुत कर उन्हें चुनाव लड़ने का आदेश दिया।

इस चुनाव में भी वह फिर भारी मतों के अंतर से सांसद चुने गए। लोकसभा में उन्होंने सीतापुर संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। ध्येय निष्ठ, समर्पित व अपनी ईमानदारी के लिए कार्यकर्ताओं के प्रेरणास्रोत दीक्षित को अपनी संसदीय पारी में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई, लालकृष्ण आडवाणी व प्रो. बलराज मधोक के निकट सहयोगी के रूप में काम करने का अवसर मिला।

सांसद के रूप में वह नई दिल्ली में सांसदों की शाखा के मुख्य शिक्षक रहे। वृद्धावस्था के बावजूद कुछ साल पहले तक वह एक आदर्श कार्यकर्ता के रूप में पार्टी गतिविधियों में सक्रिय रहे। जनसंघ के बाद वह भारतीय जनता पार्टी के भी संस्थापक रहे। 1977 में वह सीतापुर जिला पंचायत के नामित सदस्य रहे। भाजपा जिलाध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने पार्टी को अपनी सेवाएं दी।
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