रामपुर मथुरा (सीतापुर)। पहाड़ों पर बारिश व बैराजों के पानी से सरयू व शारदा नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इससे तटवर्ती गांवों के लोगों की बेचैनी कम होने का नाम नहीं ले रही है। रोजाना तीनों बैराजों से छोड़ा जा रहा लाखों क्यूसेक पानी किसी भी समय खतरा बन सकता है।
पिछले तीन दिनों में तीनों बैराजों से 12.19 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। शनिवार को 30 सेमी के इजाफे के साथ सरयू का जलस्तर 118.40 मीटर पर पहुंच गया था। रविवार को 20 सेमी कमी के साथ जलस्तर 118.20 मीटर दर्ज किया गया है। खतरे के निशान 119 मीटर से पानी 80 सेमी नीचे है। गांजर वासियों के अनुसार बैराजों का पानी यहां किसी भी समय बाढ़ का कारण बन सकता है।
सरयू के तटवर्ती इलाकों में पिछले दिनों बाढ़ आने से बिगड़ने वाले हालात अब लगभग सामान्य हैं। घरों, रास्तों व फसलों में भरा बाढ़ का पानी लगभग निकल गया है। हालांकि, गांव में रास्तों पर और घरों में अभी कीचड़ की समस्या बनी हुई है। इससे आवागमन सुगम नहीं हो पा रहा है। तटबंध पर रहने वाले बाढ़ पीड़ित धीरे-धीरे घर वापस लौटने लगे हैं। प्यारेपुरवा, अंगरौरा व बबाकुटी आदि गांवों के कई बाढ़ पीड़ित घरों में कीचड़ साफ करने में जुटे हुए हैं।
अंगरौरा के मुन्नू व पुत्ती ने बताया कि बैराजों से रोज लाखों क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, इससे बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है। फिर भी घर वापस इसलिए आना पड़ा, क्योंकि तटबंध पर पल्ली के नीचे परिवार का गुजर-बसर मुश्किल है। इस बार प्रशासन से कोई सहायता भी नहीं मिल रही है। प्यारेपुरवा के शंकर और बाबाकुटी के बच्चू ने बताया कि सरयू के जलस्तर में होने वाला उतार-चढ़ाव बेचैनी बढ़ा रहा है, बाढ़ को लेकर लोग असमंजस में हैं। तटबंध और गांव के बीच हमारी जिंदगी सिमटकर रह गई है।
बाढ़ जैसे हालात नहीं
तटबंध पर रहने वाले लोगों से आश्रय स्थलों में रहने के लिए कई बार कहा गया है, लेकिन वह निजी समस्याओं की वजह से तटबंध पर ही रहना चाह रहे हैं। इस समय सरयू का जलस्तर व जनजीवन समान्य है, बाढ़ जैसे हालात नहीं हैं।
- अनिल कुमार, तहसीलदार महमूदाबाद