रामपुर मथुरा (सीतापुर)। चौका नदी के उफनाने से बाढ़ की चपेट में आए तटवर्ती इलाके में हालात जस के तस बने हुए हैं। चार दिन से खेतों में पानी भरा होने के कारण फसलों के सड़ने का खतरा बढ़ गया है। भिखारीपुर मार्ग पर बाढ़ का पानी भरने से आवागमन प्रभावित है।
बाढ़ के पानी से घिरे 20 गांवों में संक्रामक रोग फैलने का खतरा भी बना हुआ है। इससे लोग चिंतित हैं। सरयू का जलस्तर रविवार को स्थिर रहा। कटान धीमी गति से हो रहा है। पिछले 24 घंटे में करीब सात बीघा जमीन कटकर सरयू में समा गई। लोधनपुरवा का अस्तित्व खत्म होने के बाद अब सुंदरपुरवा पर खतरा मंडरा रहा है। गृहस्थी समेटकर लोग सुरक्षित स्थान की ओर जा रहे हैं। गिरिजापुरी के तीनों बैराजों से रविवार को 3.25 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
अंगरौरा में लगे मीटर गेज से लिए गए आंकड़ों के मुताबिक रविवार को सरयू नदी का जलस्तर 118.20 मीटर पर स्थिर रहा। पानी ठहरने से धीमी गति के साथ कटान होने लगा है। शुकुलपुरवा के प्रधान श्रीराम ने बताया कि पिछले 24 घंटों के दरम्यान करीब सात बीघा कृषि योग्य भूमि कटकर सरयू में समा गई।
बेकाबू लहरें जमीन का कटान करती हुई सुंदरपुरवा की ओर बढ़ रही हैं। यहां शेष तीन घर भी यदि कटान की भेंट चढ़ गए तो सुंदरपुरवा का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। इससे पहले सरयू की लहरें लोधनपुरवा के सभी 28 घर काटकर उसका अस्तित्व खत्म कर चुकी हैं। उधर, चौका में आई बाढ़ से हालात बिगड़ रहे हैं। करीब 700 बीघा बेनीराम व फूलचंद्र ने बताया कि कई लोग अपना आशियाना खोने के बाद आवासीय पट्टा पाने का इंतजार कर रहे हैं।
रामू ने बताया कि रास्तों पर कीचड़ व पानी भरा होने से आवागमन में काफी दिक्कतें हो रही हैं। राजकुमार ने बताया कि 20 बीघे में धान की फसल लगाई थी, जो पकने वाली है। बाढ़ का पानी चार दिन से खेत में भरा है। ऐसे में फसल खराब हुई तो सारी मेहनत बेकार हो जाएगी। उमेश ने बताया कि खेत ज्यादा नीचे होने के कारण पानी निकलने का रास्ता नहीं है। अब धूप निकलने से फसल के सड़ने का डर है। रामकिशोर, मुकेश व हरिराम ने बताया कि बांसुरा से भिखारीपुर मार्ग पर बाढ़ का पानी कई दिनों से भरा है। गांव के आसपास खेत व खाली जमीन भी बाढ़ की चपेट में हैं। जलभराव से मच्छरों की भरमार हो गई है।संक्रामक रोग फैलने का खतरा बढ़ने लगा है।
पीड़ितों की समस्या का किया जा रहा समाधान
सरयू नदी का जलस्तर कम हो रहा है। चौका नदी का पानी पहले की अपेक्षा कुछ बढ़ा है। किंतु अभी तक नुकसान की स्थिति नहीं है। बाढ़ व कटान पीड़ितों की समस्याओं का निदान किया जा रहा है। इस समय जिन लोगों के घर कटे हैं उन्हें सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
-अनिल कुमार, तहसीलदार महमूदाबाद
शारदा में समा गई मंदिर की दीवार
तंबौर (सीतापुर)। बेहटा में लखनीपुर के पास शारदा नदी से कटान हो रहा है। रविवार को तटवर्ती राजकिशोर के घर के पास स्थित मंदिर की दीवार कटकर नदी में समा गई। राजकिशोर समेत गजराज, रामभूखन, परागी आदि के घर कटान के मुहाने पर हैं। खेतों में भी लगातार कटान हो रहा है। बसंतापुर के पास कटान रोधी परियोजना के करीब कटान जारी है।