घाघरा में आए उफान से जिले के रेउसा क्षेत्र में बसे 16 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। जबकि 25 गांवों के रास्ते जलमग्न हो गए हैं। घरों में पानी घुसने से दहशत का माहौल है।
लोग घरों की छतों पर शरण लिए हुए हैं। कई परिवार घर का जरूरी सामान व मवेशियों को लेकर सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। बैराजों से छोड़ा गया पानी कहर बरपा रहा है।
बुधवार को घाघरा के बाढ़ के पानी ने तटीय क्षेत्र को अपने आगोश में लेना शुरू कर दिया। देर रात तक निर्मल पुरवा, कोनी, फौजदार पुरवा, दुर्गा पुरवा, सुकई पुरवा समेत करीब 16 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। करीब 25 से 30 किलोमीटर के दायरे में घाघरा का पानी तबाही मचा रहा है।
तटीय क्षेत्र के सैकड़ों बीघा खेत बाढ़ के पानी में समा गए हैं। रास्ते भी बाढ़ के पानी में डूब गए हैं। घरों में घुटनों तक पानी भरा होने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। जिनके घर पक्के हैं, उन्होंने जरूरी सामान समेटकर छतों पर डेरा डाल लिया है।
जबकि झोपड़ी व कोठरी में रहने वाले परिवार घरेलू सामान व मवेशियों को लेकर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में पलायन कर रहे हैं। खेतों में पानी भरा होने से मवेशियों के लिए चारे का संकट गहरा रहा है।
इसके अलावा निर्मलपुरवा निवासी दुआदीन, राजेंद्र कुमार व सहगल के घर कटान के मुहाने पर हैं। ऐसे में गृहस्वामियों ने परिवार समेत घर को छोड़ दिया है। दूसरी तरफ सिसैया में फजर अली, नरेश, सागर व बोधई आदि के घर भी कटान के मुहाने पर हैं।
इन परिवारों ने भी पलायन कर लिया है। इसके अलावा, जैतहिया, जिन्ना पुरवा, रंडा कोडन आदि गांवों के मुख्य मार्ग बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।
25 गांवों के रास्ते पानी में समा गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर घाघरा नदी इसी तरह से उफनाती रही तो करीब 50 की संख्या में गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं।