रेउसा क्षेत्र के पासिनपुरवा में कटान करती नदी। - संवाद
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रेउसा (सीतापुर)। पहाड़ों पर बारिश के चलते सरयू व शारदा नदी के जलस्तर में इजाफा होने लगा है। सरयू की बेकाबू लहरें तटवर्ती गांवों के करीब पहुंच गई हैं। तलहटी में बसे 15 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। कटान पिछले कई दिनों से लगातार जारी है। करीब 200 बीघा जमीन सरयू में समा चुकी है। पासिनपुरवा की सड़क कटान के मुहाने पर है। बाढ़ का खतरा देख ग्रामीणों की धड़कने तेज हो गई हैं।
जिले में तीन तहसीलों बिसवां, महमूदाबाद व लहरपुर का बड़ा इलाका बाढ़ से हर साल प्रभावित होता है। इस बार भी सितंबर में बैराजों से छोड़े गए लाखों क्यूसेक पानी से सरयू व शारदा नदी में उफान आया। सरयू की बेकाबू लहरों ने करीब 60 से अधिक मजरों को चपेट में ले लिया था। लगभग 40 हजार की आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई थी। सैकड़ों बीघा फसलें डूब गई थीं और 600 से अधिक मकानों के अंदर तक बाढ़ का पानी भरने से कई परिवारों को सड़क के किनारे शरण लेनी पड़ी थी। धीरे-धीरे पानी घटने से हालात सामान्य हो गए।
अब मौसम ने करवट बदली और पहाड़ों पर पिछले तीन दिनों से बारिश का असर सरयू में बढ़ते जलस्तर के तौर पर नजर आने लगा है। तराई में बसे पासिन पुरवा, चौकी पुरवा, परमेश्वर पुरवा, दर्जिनरेती, गार्गी पुरवा, लाला पुरवा, दूर्गापुरवा समेत 15 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। इन गांवों से सरयू का पानी कहीं 50 तो कहीं 20 मीटर दूर हिलोरे मारता दिखाई दे रहा है।
कटान भी लगातार जारी है। ग्रामीणों के मुताबिक पिछले एक सप्ताह में लगभग 200 बीघा जमीन कटान की भेंट चढ़ चुकी है। पासिनपुरवा में कटान के मुहाने पर आने से डामर रोड का अस्तित्व खतरे में है। बाढ़ के खतरे और हो रही कटान से ग्रामीण सहमे हुए हैं।
नदियों अपनी हद में बह रही हैं। कटान में जरूर इजाफा हुआ है। एहतियात के तौर पर तटीय इलाके पर नजर रखी जा रही है।
- अविचल प्रताप सिंह, तहसीलदार बिसवां