रेउसा इलाके में पासिनपुरवा गांव के पास कटान करती घाघरा नदी। - संवाद
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रेउसा (सीतापुर)। बैराजों से लगातार छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी का असर जिले में दिखाई देने लगा है। गांजरी इलाके में शारदा और सरयू नदियां एक बार फिर उफान पर हैं। बेकाबू लहरों ने आबादी की ओर रुख कर लिया है। तटीय इलाके में बसे लगभग 15 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। ग्रामीणों के मुताबिक पानी ऐसे ही बढ़ता रहा तो हालात किसी भी समय बिगड़ सकते हैं।
जलस्तर में इजाफे के साथ मंगलवार को कटान भी तेज हो गई। तटवर्ती क्षेत्र की लगभग 40 बीघा जमीन कटान की भेंट चढ़ गई। नदियों के उफनाने से ग्रामीण सहमे हुए हैं। बिसवां तहसील में शारदा व सरयू नदी के जलस्तर में तीन दिन से बढ़ोतरी हो रही है। मंगलवार को पानी काफी बढ़ गया। इससे पासिनपुरवा, परमेश्वरपुरवा, चौकीपुरवा, दर्जिनरेती, लोधनपुरवा, लालापुरवा, गार्गीपुरवा, जटपुरवा, नगीनापुरवा व मरैली सहित करीब 15 गांवों के किनारे पानी पहुंच गया है। इन गांवों से पानी महज सौ मीटर की दूरी पर हिलोरे मार रहा है।
संपर्क मार्गों पर भरने लगा पानी
कई गांवों के बाहर संपर्क मार्गों पर पानी भरने लगा है। खेत भी जलमग्न होने लगे हैं। इससे बाढ़ की आशंका को लेकर इन गांवों के लोगों की धड़कने बढ़ गई हैं। अब वह सुरक्षित ठिकानों की तलाश में जुट गए हैं। कटान तेज होने से पिछले 24 घंटे में लगभग 40 बीघा जमीन नदी में समा गई। मंगलवार को फिर तीनों बैराजों से लगभग दो लाख 75 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। यह पानी जिले में पहुंचने पर हालात और बिगड़ सकते हैं।
बैराजों से पानी छोड़े जाने पर नदियों का जलस्तर बढ़ा है। अभी नदियां अपने दायरे में हैं। बाढ़ जैसे कोई हालात नहीं हैं। बहरहाल तटीय इलाके पर लगातार नजर रखी जा रही है।
- अविचल प्रताप सिंह, बिसवां तहसीलदार