रेउसा (सीतापुर)। उफनाई घाघरा व शारदा नदियों की बेकाबू लहरों ने तटवर्ती 15 गांवों को निशाने पर ले लिया है। पानी से घिरे इन गांवों के ग्रामीणों की मुसीबतें हर दिन बढ़ती जा रही हैं। पानी कोनी गांव के चार मकानों के बेहद करीब पहुंच गया है। इन मकानों पर कटान का खतरा मंडराने लगा है।
हालात लगातार बिगड़ने से ग्रामीण सहमे हुए हैं। मंगलवार को बैराजों से 1 लाख 90 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जिले के गांजरी इलाके में होकर बहने वाली घाघरा व शारदा नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे पानी आबादी के करीब पहुंच गया है।
घाघरा के किनारे बसे फौजदारपुरवा, कोनी, परमेश्वर पुरवा, मरेली, जैतहिया, बिल्लरपुरवा, दुर्गापुरवा, ठेकेदारपुरवा, लालापुरवा, जिन्नापुरवा, सलामतपुरवा, खुशीराम पुरवा, लोधनपुरवा, चौकीपुरवा तथा शारदा के किनारे बसे जटपुरवा गांव चारों तरफ से पानी से घिरे हुए हैं।
संपर्क मार्गों व खेतों में लहरें हिलोरे मारती नजर आ रही हैं। खाना बनाने के लिए ईंधन और जानवरों के चारे का इंतजाम करने में ग्रामीणों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। लगातार बिगड़ते हालातों के बीच मंगलवार को कोनी गांव निवासी विनोद, इंदल, सदानंद व राम निवास के मकानों पर कटान का खतरा मंडराने लगा है।
उधर, बैराजों से मंगलवार को फिर 1 लाख 90 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। ग्रामीणों के मुताबिक यह पानी गांजर में पहुंचने से हालात और बिगड़ सकते हैं।
संक्रामक रोग ने पसारे पांव
गांजरी इलाके में बाढ़ के खतरे के बीच अब संक्रामक रोग पांव पसारने लगे हैं। फौजदारपुरवा और कोनी गांव के कई लोग बुखार से पीड़ित हैं। इन गांवो के लालजी, जगेश्वर, मझिलो, राम निवास, इरुण, दिनेश, प्रमोद, सदानंद, संतोष, राहुल, हीरालाल, नन्हकू, भिखारी, राजू, संतराम, सोहनलाल, भोला, रामकुमार आदि बुखार की चपेट में हैं।
अधिकारियों ने किया तटबंध का मुआयना
रामपुर मथुरा (सीतापुर)। रेउसा चहलारी घाट से बाराबंकी के एल्गिन ब्रिज तक बने बांध का कटान रोकने के लिए कराए जा रहे बचाव कार्य का मंगलवार को एडीएम विनय पाठक व चीफ इंजीनियर सिंचाई राकेश गुप्ता ने मुआयना किया। अफसरों ने बचाव कार्य की प्रगति का जायजा लेते हुए तकनीकी अधिकारियों व कर्मचारियों को युद्ध स्तर पर जुट जाने के निर्देश दिए हैं। चीफ इंजीनियर ने कहा कि हमारा फोकस बांध को बचाना है।
अक्तूबर में होने वाली स्टीयरिंग कंपनी की बैठक तक आंकलन प्रस्तुत कर बड़ी परियोजनाओं द्वारा इस बांध को बचाने का काम किया जाएगा। एडीएम ने बताया तटबंध की कटान रोकने के लिए किनारे पर स्टड (बालू व बजरी भरी बोरियां) बनाए जाने का काम किया जा रहा है।