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बाढ़ से घिरे 120 गांव

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रेउसा/रामपुर मथुरा (सीतापुर)। सरयू नदी का जलस्तर बुधवार को खतरे के निशान से 30 सेमी. ऊपर पहुंच गया। इससे बाढ़ ने और विकराल रूप धारण कर लिया है। गांजर में 120 गांव बाढ़ के पानी से बुरी तरह घिर गए हैं। रेउसा इलाके में एक पक्का मकान सरयू में समा गया। बेकाबू लहरों ने गांजर मे 6 मकानों को निशाने पर ले लिया है। ग्रामीण अपनी गृहस्थी बटोरकर पलायन कर रहे हैं।
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राहत और बचाव कार्य के प्रशासनिक दावे उस समय बाढ़ में बहते नजर आए जब नाव नहीं मिलने पर लोगों को पैदल ही गर्दन तक भरे पानी के बीच से होकर पलायन करने को मजबूर होना पड़ा। वहीं, बैराजों से बुधवार को सवा चार लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यानी हालात सुधरने की संभावना फिलहाल नहीं है।
पहाड़ों पर भारी बारिश और बैराजों से छोड़े जाने वाले लाखों क्यूसेक पानी से ब्लॉक रेउसा में उफनाई सरयू का बुधवार को रौद्र रूप नजर आया। बाढ़ के पानी ने 20 और गांवों को चपेट में ले लिया। अब यहां कुल 80 गांव बाढ़ के पानी से बुरी तरह घिर गए हैं। खेतों, रास्तों, से लेकर घरों के भीतर तक पानी हिलोरें मार रहा है।
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लगभग 56 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित है। पीड़ित आबादी को देखते हुए नाव का पर्याप्त इंतजाम नहीं होने से लोग जोखिम उठाकर पैदल ही पलायन कर रहे हैं। सरयू की तेज धारा परमेश्वरपुरवा में लगातार कटान कर रही है। बुधवार को यहां के लालजी का पक्का मकान सरयू में समा गया। जबकि भगौती व गोपाल के घर कटान की कगार पर हैं। बाढ़ की त्रासदी के बीच सैकड़ों परिवार फंसे हुए हैं। उन तक प्रशासन की मदद भी नहीं पहुंच रही है।
दूसरी तरफ रामपुर मथुरा इलाके में 15 नए गांवों के साथ अब 40 गांवों की 15 हजार आबादी भीषण बाढ़ की चपेट में हैं। प्रशासन के राहत व बचाव कार्य के दावे नाकाफी नजर आ रहे है। ग्रामीणों को अपना सामान घर से सुरक्षित स्थानों पर लाने के लिए पर्याप्त नावें भी उपलब्ध नहीं हो रही हैं। लोग अपने सिर पर सामान लेकर गहरे पानी से निकलने को विवश हैं।
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