गांजर इलाके में बाढ़ से हालात खराब होते जा रहे हैं। जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे मुसीबत बढ़ती जा रही है। टापू पर बसे पचीसा गांव में घाघरा तेजी से कटान कर रही है। यहां के करीब 12 परिवार आशियाना छोड़ सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं।
प्रशासन का कहना है कि वह टापू पर बसे लोगों को निकालने का प्रयास कर रहा है, लेकिन वहां मौजूद परिवार सुरक्षित स्थान न मिलने के कारण पार आने को तैयार नहीं हैं। कोनी में कटान के कारण एक घर नदी में समा गया। शुक्रवार को घाघरा व शारदा बैराजों से एक बार फिर से सवा दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
बाढ़ग्रस्त गांव में घाघरा नदी कटान कर रही है। गुरुवार रात गांव के महंत का घर कटकर नदी की धार में बह गया। हालांकि वह कुछ देर पहले ही घर छोड़ पलायन कर चुके थे, जिससे अनहोनी टल गई। गांव में कमर तक पानी भरा हुआ है। लोग बाढ़ के पानी में फंसे हैं। उधर, पचीसा गांव में घाघरा तेजी से कटान कर रही है।
कटान को देखते हुए गांव के बच्चू, गोकरन, समई, गंगू, तहसीलदार, फौजदार, हरेराम, ज्वाला प्रसाद, भगोले, रामनाथ, जसदास आदि 12 परिवारों ने ऊंचे स्थानों पर डेरा डाल लिया है। यहां भी सरकारी नावों की मदद नहीं मिल रही है। इस क्षेत्र के गार्गी पुरवा, नौअन पुरवा, ठेकेदार पुरवा, रामलाल पुरवा, जैतहिया, मरेली, सोमवारी पुरवा समेत 60 गांवों में हालात खराब हैं। लोग गांवों में ही कैद होकर रह गए हैं।
रामपुर मथुरा क्षेत्र में भी घाघरा नदी का कहर जारी है। इस क्षेत्र में पंडित पुरवा, अंगरौरा, कनरखी, दुबे पुरवा, पासिन पुरवा समेत 48 गांवों में जलस्तर बढ़ता जा रहा है। उधर, घाघरा व शारदा बैराज से गुरुवार को 2,15,763 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिससे बाढ़ ग्रस्त इलाके में मुसीबत और बढ़ने का अंदेशा है।
पांच अन्य गांवों पर मंडराया संकट
गांजर के रेउसा क्षेत्र में पांच अन्य गांवों पर बाढ़ का संकट मंडराने लगा है। क्षेत्र के बजहा, कोलिया, छड़िया, बूढ़नपुर आदि एक अन्य गांव ऐसे हैं, जो अभी तक बाढ़ से अछूते रहे हैं। अब बाढ़ का पानी इन गांवों के बेहद करीब पहुंच गया है। खेत जलमग्न हैं। बाढ़ का पानी गांव की तरफ बढ़ रहा है। इन पांचों गांवों पर संकट बढ़ गया है।
पहुंचा स्वच्छ पेयजल
बाढ़ व कटान पीड़ित लोगों को पीने के लिए स्वच्छ पानी मिल सके। इसकी खातिर शुक्रवार को पानी का एक टैंकर दुर्गा पुरवा गांव के निकट पहुंचा। हालांकि इस क्षेत्र में अभी मोबाइल शौचालय की व्यवस्था नहीं की जा सकी है। बुधवार को यहां पहुंचे जिलाधिकरी अमृत त्रिपाठी ने अधीनस्थों को इस क्षेत्र में मोबाइल शौचालय की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। डीएम के निर्देश के दो दिन बाद भी उस पर अमल नहीं किया जा सका है।
टापू पर हैं 120 परिवार
बाढ़ क्षेत्र में तैनात मजिस्ट्रेट पदम सिंह ने बताया कि उन्होंने पचीसा टापू का दौरा किया है। वहां पर 120 परिवारों से उनकी मुलाकात हुई। इन परिवारों को चावल व दाल बांटी गई है। वहीं पूड़ी-सब्जी के पैकेट भी दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि टापू पर जहां कटान हो रही है, वहां से लोग हट गए हैं और वे टापू के ऊंचे स्थान पर डेरा डाले हैं। ये लोग पूरी तरह से सुरक्षित हैं। यहां बसे परिवारों को टापू से बाहर चलने के लिए कहा गया, लेकिन कोई भी टापू से बाहर निकलने को तैयार नहीं है।
जंगली जानवर की मुसीबत
बाढ़ में जहां लोग परेशान हैं, वहीं अब जंगली जानवरों ने आतंक मचाना शुरू कर दिया। गुरुवार रात बाढ़ग्रस्त इलाके से एक बकरे को जंगली जानवर उठा ले गया।
गोड़ियनपुरवा गांव बाढ़ की चपेट में है। जिसकी वजह से गांव के मेवालाल ने बकरे को सड़क के किनारे बांध रखा था। गुरुवार की देर रात एक जंगली जानवर वहां आ गया। इससे पहले कि लोग कुछ करते, वह बकरे को मुंह में दाबकर चलता बना।
मोबाइल टीमों को मिले 101 मरीज
बाढ़ ग्रस्त इलाके में लोगों के बीमार होने की खबर अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद स्वास्थ्य महकमा हरकत में आया है। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमों को इलाके में भेजा गया। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने तीन गांवों में जाकर जांच व इलाज किया। जिसमें 101 लोग बीमार पाए गए।
रेउसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक पवन वर्मा ने मोबाइल स्वास्थ्य टीमों को प्रभावित इलाके में भेजा। स्वास्थ्य टीम सोमवारी पुरवा पहुंची। यहां पर जांच के दौरान करीब 30 लोग बीमार पाए गए। इनमें किसी को मलेरिया, किसी को डायरिया की शिकायत थी। इन मरीजों को चिकित्सकों ने दवाएं दी और एहतियात बरतने की सलाह दी।
इसके बाद मोबाइल टीम कटैला पुरवा पहुंची। यहां पर करीब 100 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इनमें 31 लोग बीमार पाए गए। यहां भी डायरिया व बुखार की शिकायतें मिलीं। बीमार लोगों को दवाएं दी गईं और इलाज किया गया। इसके बाद स्वास्थ्य टीम बजहा शाहपुर गांव में पहुंची। यहां पर 110 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। यहां पर करीब 40 लोग बीमार पाए गए। इन मरीजों को भी मलेरिया व डायरिया थी। इलाज करने के बाद चिकित्सकों ने ग्रामीणों को स्वच्छ भोजन व स्वच्छ पानी का उपयोग करने की सलाह दी।