घाघरा के कहर से गांजर के लोग परेशान हैं। बसने के बाद उजड़ना इनकी नियति बन गई है। रविवार को घाघरा के जलस्तर में गिरावट हुई। लेकिन कटान तेज हो गई है। शनिवार रात 17 मकान कटकर नदी में समा गए।
जबकि 42 घर कटान के मुहाने पर हैं। नदी का ऐसा रूप देख तटीय इलाके के बाशिंदे सहम गए हैं। इन लोगों ने अपने पक्के घरों को तोड़ना शुरू कर दिया है। खेत, खलिहान, आबादी, हैंडपंप, कुआं आदि नदी निगलने को बेताब दिख रही है।
शनिवार रात से अचानक नदी के पानी में करीब 4 फीट तक की गिरावट आई। इससे बाढ़ग्रस्त इलाके का पानी कम होने लगा। हालांकि जलस्तर घटने से कटान तेज हो गई है।
तटीय इलाके के दुर्गापुरवा निवासी रामेश्वर, गंगाराम, राम नरेश, मेवालाल, देवी सहाय, पासिनपुरवा के कुंवारे, कृपाराम, म्योड़ी छोलहा के पैकरमा, रामपाल, एक अन्य पासिनपुरवा गांव के रामू, बुधराम, झब्बू, पूरन लाल, शत्रोहन, मुंशी, कमलू, विजयपाल आदि के घर कट गए।
हालांकि इन परिवारों ने घरों को समय रहते खाली कर दिया था। कोनी, दुर्गापुरवा, गोडिय़न पुरवा में नदी तेजी से कटान कर रही है। करीब 42 घर नदी की कटान के मुहाने पर मौजूद हैं। जिनको वहां के बाशिंदों ने खाली कर दिया है।
गोड़ियन पुरवा गांव में मौजूद कुआं व हैंडपंप नदी की कटान के मुहाने पर है। पासिनपुर के परमेश्वर की 5 बीघा खेती फसल समेत नदी में समा गई है। नदी जहां तटीय इलाके में कहर बरपा रही है, वहीं बीच टापू पर भी घाघरा का कहर टूट रहा है।
टापू पर भी नदी तेजी से कटान कर रही है। नदी का पानी घटने की वजह से तटीय क्षेत्र के कई इलाकों में मौजूद बाढ़ का पानी नदी की तरफ खिसक रहा है। उधर, शारदा, घाघरा व बनबसा बैराजों से रविवार को 2,20,003 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
जिसकी वजह से बाढ़ की मुसीबत अभी टलती नजर नहीं आ रही है। तटीय इलाके की हालत ये है कि कोई अपने पक्के मकान पर हथौड़े चला रहा है, तो कोई अपनी गृहस्थी का सामान सिर पर लादकर सुरक्षित ठिकाने की तलाश में है।