जिले गांजर इलाके में घाघरा का कहर अभी थमा नहीं है। बाढ़ तो चली गई है, लेकिन कटान का कहर जारी है। इन दिनों नदी का कहर टापू पर बसे पचीसा गांव पर बरप रहा है। बीते 24 घंटे में पांच घर व 77 बीघा जमीन नदी के कटान की भेंट चढ़ गई है। कई घर कटान के मुहाने पर खड़े हैं। खतरे को देखते हुए यहां रहने वाले कई परिवारों ने घरों को छोड़ दिया है।
रेउसा में टापू पर बसे पचीसा गांव में नदी ने कटान तेज कर दी है। इससे गांव के बाबूराम, दिलेराम, सुबेदार, मंशाराम, पैकरमा के घर नदी में बह गए। वहीं गांव के अवतार का 20 बीघा, लल्ला का 12 बीघा, राधे का 25 बीघा, मूले का 10 बीघा तथा परती भूमि 20 बीघा कटकर नदी में समा गया।
इस कटान की वजह से खेतों में उपज रही धान, अरहर आदि की फसल भी बर्बाद हो गई। गांव के गोकरन , मोहन, चेतराम व गीता देवी के घर कटान के मुहाने पर हैं। नदी को घर की तरफ बढ़ते देख, परिवारों ने जरूरी समान समेटकर घरों को छोड़ दिया है। नदी का पानी घट चुका है, बावजूद इसके नदी बड़ी ही तेजी से कटान कर रही है। नदी का ऐसा रुख देख, टापू पर बसने वाले ग्रामीण भयभीत हैं।
कोई पुरसाहाल नहीं
इस टापू पर बसने वाले परिवारों का दर्द है, कि उनकी सलामती के बारे में कोई फिक्रमंद नहीं है। गांव के रामसिंह, लल्ला, सूबेदार, फौजदार, लल्ला आदि का कहना है कि हाल ही में टापू पर बाढ़ आई और टापू पर कटान भी होता रहा। बावजूद इसके जिम्मेदारों ने टापू पर बसे परिवारों को बाहर निकालना मुनासिब नहीं समझा।
इस टापू पर बसे परिवारों ने करीब डेढ़ माह तक बर्बादी का दंश झेला है। टापू का हाल ये है कि टापू का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा कटान की भेंट चढ़ चुका है। जो बचा है, उस पर भी कटान हो रहा है। ऐसे में यहां पर बसे करीब 300 परिवारों को सुरक्षित स्थान की तलाश है, यहां बसे परिवारों का कहना है कि आज नहीं तो कल, यह टापू तबाह हो जाएगा। ऐसे में गृहस्थी का सामान व परिवार को लेकर घाघरा पार बसने की जरूरत है, लेकिन प्रशासन ने अभी तक यहां बसे परिवारों के लिए भूमि चिह्नित नहीं की है।