नेरी पावर हाउस के कैमहरा फीडर में लगी आग से 600 गांवों की बिजली गुल हो गई। बेकाबू लपटों ने पूरे पावर हाउस को चपेट में ले लिया। इससे कई उपकरण जलकर राख हो गए। सूचना पर पहुंचे दमकल दस्ते ने करीब 2 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद लपटों पर काबू पाया।
इससे करीब आठ लाख आबादी प्रभावित हुई। पावर कॉर्पोरेशन के अफसर व कर्मी मौके पर पहुंचकर नुकसान का आंकलन करने में जुटे हैं। अफसरों के मुताबिक पांच दिनों तक आपूर्ति व्यवस्था को पटरी पर लाने में कम से कम पांच दिन लगेंगे। आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है।
नेरी पावर हाउस में कैमहरा, पिसावां, मैगलगंज, बरगवां, बड़ागांव गुजिया व नादन फीडर हैं। इनसे लगभग 750 गांवों में बिजली आपूर्ति की जाती है। बताते हैं कि कैमहरा फीडर का ट्रिपलिंग सिस्टम कई दिनों से खराब है। मेन ट्रिपलिंग सिस्टम भी काम नहीं कर रहा है।
आपूर्ति बाधित न हो इसके लिए रविवार को मेन ट्रिपलिंग सिस्टम को अलग कर लाइन डायरेक्ट जोड़ दी गई। इसके कुछ देर बाद ही सुबह करीब 11 बजे अचानक शार्ट सर्किट से आग लग गई। कोई कुछ समझ पता तभी लपटें बेकाबू हो गईं। देखते ही देखते आग ने पूरे पावर हाउस को अपनी चपेट में ले लिया।
हादसे के समय पावर हाउस में मौजूद कर्मियों ने वहां से बाहर भागकर किसी तरह अपनी जान बचाई और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। मौके पर पहुंचे दमकल दस्ते ने करीब दो घंटे तक कड़ी मशक्कत के बाद किसी तरह आग पर काबू पाया। आगजनी में कैमहरा व पिसावां की ट्रॉली व अन्य फीडरों की वायरिंग जलकर राख हो गई।
कई उपकरण फुंकने से नेरी पावर हाउस के दायरे में आने वाले करीब 600 गांवों की बिजली गुल हो गई है। आपूर्ति ठप होने से इन गांवों में रहने वाली लगभग आठ लाख आबादी प्रभावित होगी। अधिशासी अभियंता एके श्रीवास्तव ने बताया कि हादसे के कारणों व नुकसान का आंकलन किया जा रहा है।
एसडीओ रंजीत कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच में आग लगने की वजह शार्ट सर्किट बताई जा रही है। आग से करीब 600 गांवों की आपूर्ति प्रभावित हो गई है। पांच दिनों में आपूर्ति बहाल होने की उम्मीद है।