सकरन (सीतापुर)। ग्राम पंचायत सकरन में 48.54 लाख रुपये के घोटाले के मामले में तत्कालीन सकरन प्रधान, एडीओ आईएसबी व सचिव के विरुद्ध पुलिस ने रविवार को एफआईआर दर्ज की है। यह रिपोर्ट एडीओ पंचायत ने दर्ज कराई है। तीनों आरोपियों से गबन की गई धनराशि की रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सकरन ब्लॉक की ग्राम पंचायत सकरन में हैंडपंप रिबोर, स्ट्रीट व सोलर लाइट तथा ह्यूमपाइप के नाम पर जमकर भ्रष्टाचार किया गया। इसकी शिकायत गांव के रामचंद्र यादव ने विभागीय अधिकारियों से की। कार्रवाई न होने पर रामचंद्र ने हाईकोर्ट में रिट दायर कर दी। इसके बाद 22 जून 2025 में जिले से आई तीन सदस्यीय टीम ने मामले की जांच की। इसमें बगैर कार्य कराए सरकारी धन निकाले जाने की पुष्टि हुई।
जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर ने विगत सोमवार को मामले में कार्रवाई करते हुए प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज करते हुए 48.54 लाख रुपये की रिकवरी व एफआईआर के आदेश दिए थे। इसमें प्रधान संतोषी देवी यादव पर 18,55,760 रुपये, तत्कालीन सचिव अर्पित गुप्ता पर 24,27,485 रुपये व प्रशासक जितेंद्र रस्तोगी (एडीओ आईएसबी) को 5,71,725 रुपये गबन करने का दोषी पाया था। डीएम के निर्देश पर खंड विकास अधिकारी श्रीश कुमार गुप्ता ने एडीओ पंचायत प्रेम प्रकाश चौधरी को पत्र लिखकर दोषियों पर मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए थे।
एडीओ पंचायत ने शनिवार को सकरन थाने में तीनों लोगों के विरुद्ध तहरीर दी थी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर प्रधान, तत्कालीन सचिव व एडीओ आईएसबी के विरुद्ध बीएनएस की धारा 116(5) के तहत अभियोग पंजीकृत कर लिया है। खंड विकास अधिकारी श्रीश कुमार गुप्ता ने बताया कि डीएम के निर्देश पर दोषियों पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। रिकवरी के लिए नोटिस जारी किए जाने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।