सीतापुर। परियोजना निदेशक डीआरडीए गजेंद्र प्रताप सिंह को शासन ने 28 जुलाई को आयुक्त ग्राम्य विकास के दफ्तर से संबद्ध किया था। इसके बावजूद वह जिले से कार्यमुक्त नहीं हुए। इसे गंभीरता से लेते हुए शासन ने गुरुवार को उन्हें स्वत: कार्यमुक्त कर दिया। संबद्धता कार्यालय में योगदान न करने पर उन्हें अवैतनिक अवकाश पर माना जाएगा। यदि फिर भी उन्हाेंने पद नहीं संभाला तो सेवा अवरोध की भी कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।
शासन ने 28 जुलाई को पीडी गजेंद्र प्रताप सिंह को आयुक्त ग्राम्य विकास कार्यालय में संबद्ध करने संबंधी आदेश जारी किया था। इसमें कहा गया था कि संबंधित अधिकारी तत्काल संबद्धता के कार्यालय में योगदान कर तत्संबंधी योगदान आख्या शासन और आयुक्त ग्राम्य विकास को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
इसके बाद भी पीडी को कार्यमुक्त नहीं किया गया है। उन्होंने आयुक्त कार्यालय में योगदान नहीं किया। गुरुवार को ग्राम्य विकास विभाग के विशेष सचिव राजेंद्र सिंह ने पीडी को स्वत: कार्यमुक्त करने का आदेश जारी किया। वरिष्ठ कोषाधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि स्वत: कार्यमुक्त होने की तिथि से पीडी का वेतन संबंधित जिले से आहरित नहीं किया जाएगा।
कार्यमुक्त के बाद भी सामग्री अंश का पौने दो करोड़ का किया भुगतान
गजेंद्र प्रताप सिंह परियोजना निदेशक के साथ ही पहला ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी के दायित्वों का अतिरिक्त प्रभार के रूप में कार्य कर रहे हैं। उन्हें तीन अगस्त को शासन ने स्वत: कार्यमुक्त कर दिया। बावजूद इसके उन्होंने पहला ब्लॉक से मनरेगा सामग्री अंश की धनराशि का भुगतान किया है। सूत्रों ने बताया कि गुुरुवार को पौने दो करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया है। उन्होंने 31 जुलाई को भी पहला ब्लॉक के मनरेगा सामग्री अंश के चार करोड़ से अधिक धनराशि का भुगतान किया है।