सीतापुर की गल्लामंडी में सूखने के लिए फैलाया गया धान।
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सीतापुर। किसानों को अपनी उपज का मूल्य न मिलने से वह आहत हैं। अन्नदाता मंडियों में व्यापारियों को धान बेचने को विवश हैं। जबकि यहां वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा है। इसका प्रमुख कारण धान का अधिक नम होना है। मंगलवार को नवीन गल्ला मंडी परिसर में जिले के विभिन्न अंचलों से धान बेचने के लिए आए किसान काफी परेशान दिखे। जिले में एक अक्तूबर से धन खरीद होनी है।
महमूदाबाद ब्लॉक के ग्राम कल्ली निवासी किसान आर्यन ने बताया कि पैसों की आवश्यकता के कारण अधिक दूरी से यहां धान बेचने आए हैं। सुबह ही धान के ढेर लगा दिए हैं। लेकिन खरीददार नहीं मिल रहे हैं। इसी गांव के निवासी अजय कुमार ने बताया कि धान की बिक्री नहीं हो पा रही है। इससे चिंता बढ़ गई है। विकास खंड मछरेहटा के ग्राम रघुनाथपुर निवासी किसान अमरेंद्र ने कहा कि धान की कटाई शुरू होने पर बारिश के कारण फसल की क्षति हुई। इससे नमी अभी भी बनी है। इसी कारण मंडी में धान को सूखने के लिए लगाया है। लेकिन धान नमी बरकरार है। इसीलिए बिक नहीं पा रहा है।
मछरेहटा निवासी छोटे ने बताया कि धान बेचने के लिए लाया था। कई व्यापारी देख गए हैं। 11 सौ रुपये प्रति कुंतल की मांग को किसी ने पूर्ण नहीं किया है। इसीलिए बिक नहीं सका। व्यापारी धान में नमी बनाते हुए कम रेट लगा रहे हैं। इससे किसान आहत हैं। उनका कहना है कि जब फसल की लागत ही नहीं मिलेगी, तो परिवार का पालन-पोषण कैसे हो पाएगा। कुछ व्यापारियों से बात करने पर बताया कि वर्तमान में मंडी में एक हजार से 12 सौ रुपये में धान बिक रहा है। जिला खाद एवं विपणन अधिकारी अरविंद कुमार दुबे ने बताया कि क्रय केंद्रों पर धान एक अक्तूबर से खरीदा जाएगा।