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Sitapur News: किसानों को प्राकृतिक खेती करने का दिया प्रशिक्षण

Fri, 29 Aug 2025 11:46 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
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सीतापुर। जिले के 80 गांवों के किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए दक्ष किया जाना है। इसके लिए दो साल की कार्य योजना बनी है। संबंधित गांवों में दो-दो कृषि सखियों की तैनाती की गई है। इनका सहयोग वैज्ञानिकों के संग अन्य कृषि विशेषज्ञ कर रहे हैं। उनकी ओर से शुक्रवार को 10 गांवों के किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया। इसमें कोलंबिया विश्वविद्यालय की टीम ने भी हिस्सा लिया।
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लहरपुर के ग्राम पतवारा व रावल अदेशर में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती कार्यक्रम के तहत चयनित किसानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए जागरूक किया गया। कृषि वैज्ञानिक डाॅ. शिशिर कांत सिंह ने किसानों को बिना किसी रसायन का प्रयोग किए खेती करने की सलाह दी।
उन्होंने किसानों को खेती के साथ पशु धन बढ़ाने व देसी प्रजातियों को बढ़ावा देने के लिए जागरूक किया। उन्होंने किसानों को जीवामृत, घन जीवामृत व बीजामृत नीमास्तृ बनाने की विधि के बारे में भी बताया। कृषि सखी राजेश्वरी, पम्मी देवी, माया देवी, श्यामा देवी ने प्राकृतिक खेती के महत्व के बारे में चर्चा की। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती से कृषि उत्पादन की लागत को कम करने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।
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कार्यक्रम में प्रधान राम पाल, एडीओ कृषि राज कुमार वर्मा, आशीष मिश्रा खंड तकनीकी प्रबंधक कृषि, सर्वेश कुमार प्रविधिक सहायक, गंगाराम प्राविधिक सहायक, रामपती, उपेंद्र सिह, छंगा लाल, श्रीराम, श्याम सुन्दर, हरि भजन, जंगली, एकबाल खान, रामौतार, श्याम किशोर सहित तमाम किसान उपस्थित थे। बिसवां ब्लॉक की ग्राम पंचायत त्योला में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में कोलंबिया विश्वविद्यालय एग्री एक्सपर्ट छात्र श्रीयंक रस्तोगी, अमित, सुशा ने प्रतिभाग किया। वैज्ञानिक डाॅ. सचिन प्रताप तोमर और कृषि सखियों ने किसानों को प्रशिक्षण दिया।

कृषि सखियां मिट्टी की सेहत का रखेंगी ध्यान
उप कृषि निदेशक डाॅ. एसके सिंह ने बताया कि जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों को जागरूक करने के लिए 80 कलस्टरों का गठन 6 विकास खंडों में किया गया है। इसमें से आकांक्षात्मक विकास खंड बिसवां में 15 कलस्टरों का गठन किया गया है। शेष विकास खंडों (खैराबाद, लहरपुर, महमूदाबाद, कसमंडा व मिश्रिख) में 13-13 कलस्टरों का गठन किया गया है। प्रति कलस्टर 2-2 कृषि सखी/सीआरपी का चयन किया गया है। इनका 5 दिवसीय प्रशिक्षण कृषि विज्ञान केंद्र, कटिया मानपुर में कराया गया है, जो कलस्टर के किसानों को संगठित करेंगी। उन्हें प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए प्रेरित करेंगी। इसके साथ ही मृदा स्वास्थ्य परीक्षण के लिए मिट्टी के नमूने एकत्र करेंगी, जिससे मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार के लिए प्राकृतिक खेती आधारित सलाह किसानों को प्रदान करेंगी।
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