लहरपुर (सीतापुर)। बीते डेढ़ माह से इलाके में लगातार चहल-कदमी कर रहे बाघ से इलाके के लोगों में दहशत है। खेतों में काम करने के दौरान शनिवार की शाम किसानों को फिर बाघ दिखाई दिया। हलचल व शोर-गुल सुनकर बाघ झाड़ियों में चला गया। सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने रविवार को मौके पर पहुंचकर कॉम्बिग की लेकिन बाघ का कुछ पता नहीं चल सका।
बाघ की दहशत से किसान खेत जाने से डर रहे हैं। बाघ भूख मिटाने के लिए छुट्टा मवेशियों का शिकार कर रहा है। अब तक वह दो किसानों को भी हमला कर घायल कर चुका है। वह वन विभाग के लोगों को छकाते हुए अभी तक लगाए गए पिंजरों के आसपास तक नहीं फटका है।
लहरपुर वन रेंज के निबौरी में रहने वाले किसान राजेश, रामनरेश, आदि शनिवार की शाम खेतों में काम कर रहे थे। इस बीच नाले के किनारे बैठे हुए बाघ को देखकर उनकी घिग्घी बंध गई। शोर मचाते हुए किसान गांव की ओर भागे। किसानों के मुताबिक शोर सुनकर बाघ झाड़ियों में चला गया। किसानों ने गांव पहुंचकर बाघ देखे जाने की सूचना ग्रामीणों और वन विभाग को दी। रविवार को वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर कॉम्बिग की, लेकिन बाघ का पता नहीं चला। किसानों ने बताया कि गत 4 अप्रैल को सबसे पहले रावल अदेसर में बाघ ने दो सांडों को निवाला बनाया था। इसके बाद 23 अप्रैल को रावल के और एक मई को निबौरी के किसान पर हमला किया।
बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग ने रावल में नाले के पास दो पिंजरे व कैमरे लगाए हैं। बाघ इतना चालाक है कि पिंजरों के पास तक नहीं फटक रहा है। किसान दहशत के कारण अपने खेतों पर नहीं जा पा रहे हैं। वन क्षेत्राधिकारी अभिषेक सिंह ने बताया कि वन विभाग की टीम लगातार बाघ को पकड़ने के लिए निरंतर काॅम्बिग कर रही है। उसे ट्रेंकुलाइज करने के लिए अनुमति भी मांगी गई है। साथ ही प्रभावित गांवों के किसानों को खेतों में अकेले न जाने के लिए जागरूक भी किया जा रहा है।