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आठ बीघा जमीन नदी में समाई

Tue, 23 Aug 2016 11:19 PM IST
Amarujala Bureau
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river - फोटो : amar ujala
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कटान की रफ्तार धीमी पड़ने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। सोमवार रात घाघरा ने करीब 8 बीघा जमीन को अपनी आगोश में ले लिया। तटीय क्षेत्र के परिवारों को मलेरिया जैसी बीमारी सताने लगी है। क्षेत्र के लोग बुखार व उल्टी-दस्त से परेशान नजर आ रहे हैं। 
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रेउसा में घाघरा गोड़ियन पुरवा व पचीसा गांव के निकट खेती को काट रही है। सोमवार रात गोड़ियन पुरवा निवासी बाबू  व सूरज की 5 बीघा जमीन को घाघरा निगल गई है। जबकि पचीसा गांव में करीब एक बीघा जमीन कटकर नदी में समा गई है। रामपुर मथुरा क्षेत्र के ग्राम पंडितपुरवा में घाघरा नदी कटान कर रही है।

यहां पर बच्चू लाल, छंगा लाल व बनवारी लाल की 2 बीघा जमीन कटकर घाघरा में बह गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बीते एक सप्ताह की अपेक्षा अब कटान की रफ्तार धीमी पड़ी है लेकिन अब बीमारियां लोगों को जकड़ रही हैं। दुर्गा पुरवा गांव में सिपाही लाल, सोबरन लाल, देशराज, आदर्श, रुचि, मैकू, छत्रपाल आदि करीब 40 लोग बीमार हैं।
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इसी तरह से दूलामऊ में राजेश, रेखा, चमेली, मुकेश आदि 30 लोग पड़े हैं। पचीसा गांव में अमेरिका, अभिशाष, राजेश, सुबेहा, बंशी, उमेश, जीवन लाल आदि 40 लोग बीमार पड़े हैं। गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें न पहुंचने की वजह से बीमार परिवार क्षेत्र के प्राइवेट चिकित्सकों से इलाज कराने को मजबूर हैं।

करीब 500 के आसपास लोग बीमार पड़े हैं। जो बुखार, उल्टी, दस्त आदि रोगों की चपेट में हैं। माना जा रहा है कि बाढ़ के बाद क्षेत्र में दूषित पानी भरा हुआ है। क्षेत्र में बीमारियों की रोकथाम के लिए समय रहते उचित उपाय न करने से संक्रमण फैल रहा है। जिसकी वजह से बड़ी संख्या में लोग बीमारियों की चपेट में आते जा रहे हैं।

क्षेत्र में ऐसा कोई गांव नही है, जहां पर 20 से 30 लोग बीमार न पड़े हों। कुल मिलाकर क्षेत्र के लोग अब बीमारी से पस्त नजर आ रहे हैं। उधर शारदा व घाघरा बैराजों से 72835 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। नदी का पानी किनारों से करीब 5 फीट नीचे तक खिसक गया है।

आर्थिक संकट से इलाज नहीं
बीते डेढ़ माह तक गांजर क्षेत्र के लोगों ने बाढ़ का संकट झेला है। जिसकी वजह से उनके घर का राशन समाप्त हो गया। जो जमा पूंजी थी वह डेढ़ माह में खर्च हो गई। कहीं भी काम न मिलने की वजह से उन पर आर्थिक संकट आ गया। ऐसे में पीड़ितों के परिवार के सदस्यों के बीमार पड़ने से वे इलाज भी नही करा पा रहे हैं। वजह ये है कि इस क्षेत्र में अब प्राइवेट चिकित्सक ही सहारा है। प्राइवेट चिकित्सक बगैर फीस लिए इलाज नही करेंगे। 
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