सीतापुर। स्मार्ट चिप की आपूर्ति बाधित होने से करीब 1600 आवेदकों के ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) फंस गए हैं। चिप के अभाव में डीएल प्रिंट नहीं हो पा रहे हैं। ड्राइविंग लाइसेंस नहीं मिलने से आवेदक परेशान हैं। जिले के एआरटीओ कार्यालय में रोजाना लर्निंग लाइसेंस के लिए औसतन 52 आवेदन आते हैं। इसके सापेक्ष लगभग 45 डीएल प्रतिदिन जारी किए जाते हैं। विभागीय अफसर बताते हैं कि ड्राइविंग लाइसेंस में लगने वाली चिप का इन दिनों संकट है।
चिप के अभाव में डीएल बनने का काम सुस्त हो गया है। जिले के करीब 1600 आवेदकों को पिछले डेढ़ माह से डीएल नहीं मिल पा रहा है। इन ड्राइविंग लाइसेंस में नए स्थायी लाइसेंस, रिन्यूअल किए गए लाइसेंस, द्वितीय लाइसेंस, नए हैवी लाइसेंस आदि शामिल हैं। परेशान आवेदक विभागीय कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। दरअसल, डीएल के लिए आवेदन करने के बाद सारी औपचारिकताएं पूरी कर दस्तावेज लखनऊ भेजे जाते हैं। लखनऊ से एक एजेंसी के माध्यम से कार्ड प्रिंट होते हैं। डीएल का प्रिंट कर उन्हें आवेदक के पते पर भेजा जाता है। स्मार्ट चिप के अभाव में डीएल की सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद भी प्रिंट नहीं हो पा रहा है। यह समस्या जनपद की नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की है। विभागीय अफसर जल्द चिप उपलब्ध होने के बाद समस्या दूर होेने का दावा कर रहे हैं।
यह है प्रक्रिया
जिले से आवेदकों का मॉनीटरिंग सिस्टम (केएमएस) के पास जाता है। इसके बाद स्मार्ट चिप कंपनी के कर्मचारी आवेदक का डाटा स्मार्ट चिप में ट्रांसफर करते हैं। स्मार्ट चिप विदेश से मंगाई जाती है।
एक माह बाद भी डीएल का इंतजार
बिसवां के संजय श्रीवास्तव ने गत 5 अक्तूबर को डीएल नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था। उन्होंने बताया कि अब तक लाइसेंस नहीं मिल पाया है। वाहन चलाते समय पुलिस की कार्रवाई का डर बना रहता है। अनिल कुमार बताते हैं कि डीएल के लिए 20 दिन पहले आवेदन किया था। बताया गया था कि 15 दिन में डीएल बनकर घर के पते पर भेज दिया जाएगा। अब तक डीएल का इंतजार ही कर रहे हैं।
जल्द दूर होगी चिप की कमी
डीएल आवेदकों के लिए दफ्तर में चार काउंटर बनाए गए हैं। चिप की कमी से कुछ दिक्कत है, एक सप्ताह में चिप की कमी दूर होगी। इसके बाद आवेदनकर्ताओं को लाइसेंस मिलना शुरू हो जाएंगे। - माला बाजपेयी, एआरटीओ प्रशासन