जिले की ट्रेजरी में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने उस वक्त हंगामा शुरू कर दिया, जब यहां के बाबू ने बिलों के भुगतान में देरी की। अधिकारियों का आरोप है कि यहां के बाबू बगैर सुविधा शुल्क लिए, काम ही नहीं करते हैं। हंगामा देख ट्रेजरी अधिकारी ने जांच का आश्वासन देकर अधिकारियों को शांत कराया।
स्वास्थ्य महकमे के कई बिल भुगतान के लिए ट्रेजरी में आए थे। यहां पर मौजूद बाबुओं ने उन बिलों को पास करने में आनाकानी की। सूचना पर एसीएमओ डॉ. बीके वर्मा ट्रेजरी पहुंचे। यहां पर बाबुओं ने न जाने क्या कहा, एसीएमओ भड़क गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि 31 मार्च 2017 को उनके वेतन एरिअर, टीए व कार्यालय के विभाग भुगतान के बिल जिनका भुगतान करीब साढ़े छह लाख रुपया था। यहां के बाबुओं ने लटका दिया। जिसकी वजह से भुगतान नहीं हो सका।
बिलों को दोबारा ओके करने के लिए जब बिल मांगे गए, तब 3 माह 12 दिन बाद बिल वापस किए गए। बिल एक बार फिर से भेजे गए, अब बाबू बिल को पास कराने के लिए 15 हजार रुपये मांग रहे हैं।
उन्होंने ट्रेजरी के मोहित श्रीवास्तव व महेंद्र अग्रवाल आदि पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। जो बिल फंसे थे, उनमें एक बिल एसीएमओ डॉ. पीके सिंह का भी था। हंगामा बढ़ते देख ट्रेजरी अधिकारी सुरेंद्र पाल मौके पर पहुंचे।
जिन्होंने एसीएमओ को भरोसा दिलाया कि जल्द ही उनके बिल पास होंगे और जिन लोगों ने बिल पास करने के लिए घूंस मांगी है, उनकी जांच की जाएगी। जांच का आश्वासन मिलने पर एसीएमओ शांत हुए।