जिले के गांजरी क्षेत्र में कहर बरपा रही घाघरा नदी मंगलवार को पूरी तरह से शांत हो गई। उसका जलस्तर काफी नीचे खिसक गया है, वहीं कटान भी थम गया है। इसके बावजूद इस क्षेत्र में रहने वालों की मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं।
खासकर टापू पर बसे पचीसा गांव में रहने वालों की। यहां पर दर्जन भर की संख्या में बच्चे बीमार पड़े हैं। पचीसा गांव में केशराम का पुत्र संदीप (6), बाबू की पुत्री रीना देवी (5), बाबू का पुत्र कुलदीप (6), ब्रम्हा का पुत्र बबलू (4), मुरली का पुत्र वीरेश (8) आदि सहित करीब दर्जन भर बच्चे बीमार पड़े हैं।
अधिकतर बच्चों के शरीर पर दाने निकले हैं, जबकि कई को उल्टी, दस्त व बुखार की शिकायत है। इन बच्चों के परिवारीजनों का कहना है कि अगर इलाज के लिए जाना पड़े तो करीब बीस किलोमीटर का सफर तय करना पड़ेगा।
इसमें तीन किलोमीटर की दूरी घाघरा नदी केे पानी पर तय करनी पड़ेगी। एक किलोमीटर की दूरी तक रेत पर चलना पड़ेगा। जिसके बाद सड़क मिलेगी, जिससे सोलह किलोमीटर की दूरी तक चलकर रेउसा अस्पताल पहुंचना पड़ेगा।
नाव का साधन उपलब्ध न होने से ग्रामीण बीमार बच्चों को नदी पार लाने में असमर्थता जता रहे हैं। ग्रामीण अपनी किस्मत को कोस रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहले बाढ़ ने परेशान किया, बाद में कटान ने अब बीमारी तंग कर रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मदद करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि बीमार बच्चों की संख्या अधिक है, इसलिए वे नदी पार नहीं आ सकते, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रशासन के संसाधन से गांव पहुंच सकती है और बच्चों का इलाज करके उनकी जान बचा सकती है।
इसके अलावा निर्मल पुरवा, गोड़ियन पुरवा, पासिन पुरवा में भी बच्चों को बुखार आने की शिकायतें हैं, यहां भी ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम के गांवों में न पहुंचने की वजह से बीमारी तेजी से पांव पसार रही हैं।