श्रावण मास की पूर्णिमा पर नैमिषारण्य चक्रतीर्थ पर हजारों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। मठ और मंदिरों में जाकर देवी-देवताओं की पूजन-अर्चना की और आशीर्वाद लिया। श्रावणी महापर्व पर चक्रतीर्थ पर आचार्यों ने विधिवत मंत्रोच्चारण के बीच श्रद्धालुओं को श्रावणी पूजन कराया।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह श्रावण मास का अंतिम दिन होता है। इस दिन ब्राह्मण कर्म शुद्धि के लिए विशेष उपक्रम करते हैं। इस दिन यज्ञोपवीत के पूजन व उपनयन संस्कार का विशेष महत्व होता है। श्रावणी पर्व के दिन यज्ञोपवीत धारक नवीन यज्ञोपवीत धारण करते हैं।
श्रावण मास की पूर्णिमा पर गुरुवार को धार्मिक एवं पौराणिक तीर्थ नैमिषारण्य चक्रतीर्थ परिसर में श्रावणी महापर्व के पूजन का प्रारंभ हुआ। सुबह से शुरू यह सिलसिला दोपहर तक चलता रहा। इस दिन हजारों श्रद्धालुओं ने चक्रतीर्थ और गोमती नदी में डुबकी लगाई और पूजा-अर्चना की।
बाद में श्रद्धालुओं ने मां ललिता देवी मंदिर, सूतगद्दी, शौनक गद्दी, व्यास गद्दी, हनुमान गढ़ी, काली पीठ समेत तीर्थ भूमि के प्रमुख शिव मंदिर, बाबा देवदेवेश्वर, भूतेश्वर नाथ, सिद्धश्वर नाथ, बाबा काशी विश्वनाथ आदि देव स्थानों पर पूजन-अर्चन किया।
नैमिषारण्य तीर्थ के अनन्त श्री वासुदेव संस्कृत महाविद्यालय में संस्कृत दिवस मनाया गया। इस मौके पर महाविद्यालय के प्रधानाचार्य पं सदानन्द द्विवेदी ने संस्कृत भाषा पर प्रकाश डालते हुए छात्रों को संस्कृत का महत्व बताया। परिसर में पौधरोपण भी किया गया। महाविद्यालय के विवेक दीक्षित, मनीराम तिवारी ने विद्यार्थियों को संस्कृत भाषा के महत्व व इसकी उपयोगिता बताई।