यह हालत तब है जब इस जिले में जनवरी से अब तक डेंगू के चार मरीज मिल चुके हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में जिले में जनवरी से अब तक तीन मरीजों के मिलने की पुष्टि हुई है।
जिले में कहीं भी फॉगिंग व कीटनाशक दवाओं के छिड़काव भी नहीं हुए हैं। ऐसे में मच्छरों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। हाल ही में दो सितंबर को शहर के मोहल्ला खूबपुर निवासी सुनील कुमार को डेंगू होने की पुष्टि हुई थी।
सुनील कुमार का इलाज खैराबाद के बीसीएम हॉस्पिटल में कराया जा रहा था। बीसीएम हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने डेंगू होने की रिपोर्ट तैयार की थी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में सुनील कुमार का नाम नहीं जोड़ा गया। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में जनवरी से अब तक डेेंगू के तीन मरीज मिलने का आंकड़ा दर्ज है।
उधर, राज्य सरकार ने प्रदेश में 195 मरीजों के सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे को इस रोग से निपटने को अलर्ट जारी कर दिया है। रविवार को अमर उजाला टीम इस अलर्ट की हकीकत देखने को जिला अस्पताल पहुंची तो वहां पर अलर्ट की हवा निकल गई।
जिला अस्पताल में मरीजों की जांच व इलाज को कौन कहे, उनके लिए अलग से वार्ड तक दुरुस्त नहीं किया जा सका था। वहीं इमरजेंसी में बैठे चिकित्सक भी अलर्ट को लेकर सतर्क नजर नहीं आए। इस बदहाली के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी तैयारी पूरी होने के साथ ही जांच व इलाज तथा डेंगू के मरीजों के लिए अलग से वार्ड तैयार करने का दावा कर रहे हैं।
जिस वार्ड को डेेंगू के मरीजों के लिए दुरुस्त करने की बात कही जा रही थी, वह आइसोलेशन वार्ड था। जहां पर गंदगी के साथ अन्य रोगों के मरीज भर्ती नजर आ रहे थे। न तो बेड दुुरुस्त थे और न ही उस वार्ड में कोई नर्स व डॉक्टर मौजूद था।