आलम यह रहा कि सड़क पर चलने वाले वाहनों को दिन में ही हेडलाइट जलानी पड़ी। उधर, ठंडी हवाओं ने लोगों को सिहरने पर मजबूर कर दिया। हालांकि पारा स्थिर रहा और 11:26 बजे कोहरा छटने पर आसमान में सूर्यदेव ने दर्शन दिए, लेकिन मौसम खुलने के बावजूद रोज के मुकाबले धूप कमजोर रही।
शाम 6 बजे के बाद धुंध फिर से तैरनी लगी। सिहरन बढ़ने से लोग शाम गहराते ही घरों में दुबक गए। बुधवार सुबह लोग नींद से जागे तो घने कोहरे व सर्द हवा ने उनका स्वागत किया। कोहरा इस कदर घना था, कि 100 मीटर दूर भी कुछ नजर नहीं आ रहा था।
वाहन चालकों को हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा। इस बीच सूर्यदेव ने अपनी चमक बिखेरने का प्रयास कई बार किया लेकिन हर बार घने बादलों ने सूर्यदेव को अपने आगोश में छिपा लिया। हालांकि 11:30 बजे कोहरा छटा तो धूप खिल उठी, लेकिन धूप में रोज के जैसी तपिश महसूस नहीं हुई।
धूप कमजोर होने से सर्द हवाओं ने सिहरन बढ़ाई। मौसम के बिगड़े मिजाज देख बाहर निकलने से बचते रहे। जरूरी काम से ही लोग घरों से निकले। सांझ ढलते ही कोहरे की चादर फिर से लहराने लगी।
शाम को गलन में इजाफा हुआ तो लोग घरों में दुबक गए। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार बुधवार को अधिकतम तापमान 22 डिग्री और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।