गोंदलामऊ। 84 कोसी परिक्रमा में पहले से दूसरे पड़ाव की यात्रा भी आसान नहीं होगी। जिस मार्ग से परिक्रमार्थी गुजरेंगे, वह मार्ग कई जगह पर बदहाल है। कई जगह पर गिट्टियां उखड़कर मार्ग पर बिखरी पड़ी हैं। महर्षि गर्ग आश्रम का तीर्थ सूखा पड़ा है। कैलाश आश्रम भी गंदगी व अव्यवस्था का शिकार है। ऐसे में रामादल को परिक्रमा के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
सतयुग का इतिहास संजोए 84 कोसी परिक्रमा बुधवार 18 फरवरी से प्रारंभ होगी। नैमिषारण्य से शुरू होकर रामादल अपना पहला पड़ाव कोरौना में डालेगा। परिक्रमार्थी कोरौना में रात्रि विश्राम कर 19 फरवरी की सुबह चार बजे दूसरे पड़ाव हरदोई जनपद के हरैय्या की तरफ रवाना होंगे। कोरौना से आगे बढ़ने पर गांव में ही रास्ता क्षतिग्रस्त है। ग्रामीणों ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत पाइप लाइन डालने के लिए रास्ता खोदा गया था, फिर उसे दुरुस्त नहीं कराया गया। आगे बढ़ने पर प्राचीन कैलाश आश्रम पड़ेगा।
इस आश्रम की ओर जाने पर महुकमपुर गांव में मार्ग पथरीला है। इस पर गिट्टियां व पत्थर पड़े हैं। कैलाश आश्रम में श्रद्धालु रुककर स्नान ध्यान करते हैं, लेकिन यहां न तो ठहरने का साधन है, न ही बिजली व पानी की व्यवस्था। हैंडपंप भी श्रद्धालुओं के सापेक्ष पर्याप्त नहीं हैं। कैलाश आश्रम में साफ-सफाई के अभाव में गंदगी व्याप्त है। मंदिर में लगे हैंडपंप के आसपास फैली गंदगी व कीचड़ तक को साफ नहीं कराया गया है। परिक्रमार्थी जिले में करीब 15 किलोमीटर चलकर दूसरे पड़ाव हरैय्या पहुंचेंगे। इस 15 किलोमीटर की दूरी के बीच कई जगह पर मार्ग बदहाल व गंदगी का शिकार है।