नैमिषारण्य। पितृपक्ष के दूसरे दिन रविवार को नैमिषारण्य में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की आत्मिक शांति और तृप्ति की कामना के साथ पवित्र तीर्थ जल में विधि-विधान से जल तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म किया। सुबह से ही विभिन्न तीर्थ घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों से तीर्थ क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय बना रहा।
धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृपक्ष में नैमिषारण्य के पवित्र जल में तर्पण करने और नाभि गया में पिंडदान करने का विशेष महत्व है। माना जाता है कि श्रद्धापूर्वक किए गए तर्पण और पिंडदान से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है तथा वे प्रसन्न होकर अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। इसी आस्था के चलते दूर-दराज क्षेत्रों से भी श्रद्धालु नैमिषारण्य पहुंचे।
आचार्य रमेश द्विवेदी और श्रीधर द्विवेदी ने श्रद्धालुओं को वैदिक रीति-रिवाज और शास्त्रीय पद्धति के अनुसार तर्पण कराया। श्रद्धालुओं से संकल्प दिलाने के बाद पितरों की तृप्ति के लिए पिंडदान और श्राद्ध कर्म संपन्न कराया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों का स्मरण कर उनकी आत्मिक शांति की प्रार्थना की। आचार्यों के अनुसार पितृपक्ष में श्रद्धा के साथ किया गया तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य पितरों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का माध्यम है। धार्मिक मान्यता है कि इससे सात पीढ़ियों तक के पितरों को संतुष्टि प्राप्त होती है।