स्वच्छ भारत अभियान के तहत जारी स्वच्छता सर्वेक्षण की रिपोर्ट में शहर 407 पायदान पर है। 434 शहरों के बीच हुए इस सर्वे के आधार पर जारी रैंकिंग में सीतापुर शहर गंदे शहरों में शुमार किया गया है।
सफाई कर्मियों की भारी भरकम फौज होने के बाद भी शहर की यह बदरंग तस्वीर व्यवस्था की पोल खोल रही है। वहीं साल साफ-सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये खपाने के बाद भी जिले की हालत जस की तस है।
केंद्र सरकार स्वच्छता पर काफी जोर दे रही है। इसी के तहत शहरों में स्वच्छता सर्वेक्षण के जरिये रैंकिंग तय की जाती है। स्वच्छता सर्वेक्षण-2017 के गुरुवार को जारी आंकड़ों में सबसे निचले 50 शहरों में 25 शहर यूपी के हैं।
जिनमें सीतापुर 407वें पायदान पर है। यह शर्मनाक हालात तब हैं, जब सफाई इंतजाम दुरुस्त रखने को अफसरों व कर्मियों का भारी-भरकम अमला तैनात है। हर महीने साफ-सफाई के नाम पर लाखों रुपये पानी की तरह बहाए जाते हैं लेकिन शहर में साफ-सफाई कहीं भी नहीं दिखती।
हर तरफ कूड़े के ढेर व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं। सर्वे की रिपोर्ट में भी शहर को 407 रैंकिंग मिली है। इसके लिए शहर को गंदगी से सराबोर करने के जितना जिम्मेदार सरकारी मुलाजिम हैं, उससे कहीं ज्यादा यहां के नागरिक हैं।