इन दिनों धान, गन्ना व मूंगफली की फसल को सिंचाई की जरूरत है। सावन में उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं होने से किसानों की उम्मीद भादों पर टिकी थी। एक सप्ताह बीतने के बाद भी बादल अब भी मेहरबान नहीं हुए हैं।
इस हालत में जिले में सूखे जैसे हालात नजर आ रहे हैं। प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक कम बारिश से जिले के ब्लॉक मछरेहटा में सबसे खराब स्थिति है। मछरेहटा को सेमी क्रिटिकल श्रेणी में रखा गया है।
इसके अलावा पिसावां, महोली, गोंदलामऊ, सिधौली व संदना के हालात भी संतोषजनक नहीं हैं। इन क्षेत्रों में वॉटर लेबल काफी नीचे जा पहुंचा है। हैंडपंप व बोरिंग पानी छोड़ने लगी हैं। किसान राम लखन व महेश कुमार बताते हैं, कि धान की फसल सूखने लगी है। निजी ट्यूबवेल का पानी फसलों के लिए बारिश के पानी जैसा उपयोगी नहीं होता है।
क्योंकि बारिश के पानी की नमी ज्यादा दिनों तक रहती है। जबकि ट्यूबवेल से लगाया जाने वाला पानी जमीन की ऊपरी सतह पर दौड़ता है। फिर जल्द ही सूख भी जाता है। किसान विनोद कुमार, राजेश सिंह व कालिका के अनुसार सबसे ज्यादा नुकसान धान की फसल को हो रहा है।
पिछले तीन माह में बारिश की स्थिति
जून - 91.83 मिमी.
जुलाई - 186.04 मिमी.
अगस्त - 150.04 मिमी.
खरीफ फसलों की खेती का रकबा
फसल बोवाई
धान 1,69,842
मक्का 10,273
ज्वार 3,534
बाजरा 2,487
उर्द 13,996
अरहर 4,041
मूंगफली 2,412
तिल 6,033
(भू-भाग हेक्टेयर में)
एक बीघा फसल सिंचाई में खर्च होते 400 रुपये
निजी ट्यूबवेल से खेत में पानी लगवाने के लिए 120 रुपये से 150 रुपये तक प्रति घंटा की दर से शुल्क देना पड़ता है। किसान पंकज सिंह के मुताबिक एक बीघा खेत में दो से तीन घंटे का समय लग जाता है। इस हिसाब से एक बीघे फसल की सिंचाई में औसतन 400 रुपये खर्च हो जाते हैं।
सूखे जैसे हालात नहीं
जिले में सूखे जैसे हालात नहीं हैं। जुलाई व अगस्त में औसत बारिश हुई है। इसके अलावा अन्य जल स्रोतों को संरक्षित कर उन्हें भी उपयोगी बनाया जा रहा है।
डीके दोहरे, नोडल अधिकारी ‘जल बचाओ समिति’