शादी के महज दो माह बाद ही दहेज के लिए दरिंदों ने एक नवविवाहिता की हत्या कर दी। इसके बाद उसके चेहरे व शरीर के अन्य हिस्सों को तेजाब से जला दिया। दो दिनों से लापता विवाहिता का शव सोमवार सुबह खेत में मिलने पर मायके वाले भड़क गए। उसके हाथ और पैर गन्ने की पत्ती से बंधे थे। मामले में लापरवाही बरतने पर एसपी ने एसएसआई को निलंबित कर दिया है। पुलिस ने 11 लोगों को नामजद किया है।
महोली के रजवापुर गांव निवासी दिनेश कुमार मिश्र ने बेटी रमा देवी (21) की शादी बीते एक मार्च को लखीमपुर खीरी के गोला क्षेत्र के अलीगंज निवासी अंकित पुत्र रामकुमार से की थी। पांच मई को अंकित पत्नी को मायके छोड़ गया। वहां रमा ने घर वालों को दहेज प्रताड़ना की जानकारी दी। रमा के पिता दिनेश ने बताया कि छह मई को दामाद ने पुत्री को फोन कर गांव के बाहर मंदिर के पास बुलाया।
रमा पति से मिलने चली गई। इसके बाद से वह लापता हो गई। मायके वालों ने उसकी तलाश की, लेकिन सुराग नहीं लगा। सोमवार को रमा का शव खेत में मिला। मायके वालों ने पति अंकित, ससुर रामकुमार, सास व जेठ सिद्धगोपाल, सत्रोहनलाल, सोनू और तीनों की पत्नियों, दो ननद बिट्टा व रेशमा सहित 11 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया है।
एएसपी डॉ. ओपी सिंह का कहना है कि केस दर्ज कर लिया गया है। शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। आरोपियों की तलाश जारी है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक रमा के हाथ, पैर गन्ने की पत्ती से बंधे थे। उसके चेहरे व अन्य हिस्सों पर तेजाब से जलने के फफोले पड़े थे। लाश दो दिन पुरानी थी। उससे दुर्गंध आ रही थी। गला दबा हुआ था, जिससे माना जा रहा है कि रमा की गला दबा कर हत्या करने के बाद तेजाब से जला दिया गया।
खबर पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। परिवारीजन पुलिस पर मामले में लापरवाही बरतने का आरोप लगाकर हंगामा करने लगे। हंगामे की खबर पाकर एएसपी डॉ. ओपी सिंह, सीओ उमाशंकर सिंह फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। एएसपी ने कार्रवाई का आश्वासन देकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बेटी के लापता होने पर पिता दिनेश ने कोतवाली में तहरीर दी।
इसमें उसने दहेज की मांग व बेटी के लापता होने का जिक्र किया। उसने शंका जताई कि बेटी के ससुराल वालों ने बुला कर उसकी हत्या कर दी। पर पुलिस इस मामले में लापरवाह बनी रही। पिता का कहना है कि जब उसकी पुत्री लापता हुई तो वह ससुराल वालों के खिलाफ तहरीर लेकर कोतवाली गया। वहां पहले से ही पुत्री की हत्या करने वाले ससुराली जन मौजूद थे।
उनसे एसएसआई बात कर रहे थे। इस दौरान उसे कोतवाली से बाहर कर दिया गया। उसका कहना है कि एसएसआई ने पुत्री के कातिलों की तहरीर भी ली थी। पुलिस चाहती तो आरोपियों को वहीं पकड़ सकती थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।