रामपुर मथुरा थाना क्षेत्र में मंगलवार रात असलहों से लैस 12 डकैतों ने एक घर में धावा बोल दिया। इसी बीच आहट पाकर परिवार की नींद खुल गई। घरवालों ने विरोध किया तो डकैतों ने एक परिवार पर हथगोले से हमला कर दिया।
हथगोले की चपेट में आने से गृहस्वामी जनार्दन सिंह की मौत हो गई, जबकि उसकी पत्नी व पुत्र जख्मी हैं। इसके बाद बदमाश करीब डेढ़ लाख का माल लेकर फायरिंग करते हुए मौके से भाग निकले। वारदात स्थल से बाराबंकी जिले की सीमा भी सटी हुई है। इस वजह से सीतापुर के अलावा बाराबंकी जिले की पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी। वारदात से पूरे क्षेत्र में दहशत है।
ग्राम छेद्दू पुरवा गोंडा देवरिया निवासी जनार्दन सिंह (35) मंगलवार रात आंगन में सो रहा था। करीब ही उसकी पत्नी आरती देवी (30), पुत्र आकाश उर्फ छोटू (5) के अलावा दो बेटियां भी लेटीं थीं। जबकि उसका बड़ा बेटा अनूप (13) अपने चचेरे भाई के साथ छत पर सो रहा था। देर रात असलहों से लैस 12 डकैतों ने उसके घर में धावा बोल दिया। डकैत कमरे का ताला तोड़ अलमारी खंगालने लगे।
इसी बीच जनार्दन की नींद खुल गई। उसने परिवार संग मिलकर लूट का विरोध किया तो डकैतों ने हथगोलों से हमला कर दिया। दो हथगोलों के हमले में जनार्दन के अलावा पत्नी व छोटा बेटा आकाश बुरी तरह घायल हो गए। धमाकों की आवाज इतनी तेज थी कि गांव वाले भी शोर मचाते हुए मौके पर भागे। भीड़ को अपनी तरफ बढ़ते देख डकैत फायरिंग करते हुए लूट का माल लेकर भाग गए।
इधर, जब गांव के लोग जनार्दन के घर पहुंचे तो हथगोले के हमले में उसकी मौत हो चुकी थी। गंभीर रूप से जख्मी आरती व आकाश को किसी तरह सीएचसी में भर्ती कराया गया। पत्नी आरती ने अज्ञात डकैतों के खिलाफ थाने में तहरीर दी है।
उधर, मामले की सूचना मिलते ही एसपी सौमित्र यादव, एएसपी सुभाष चंद्र गंगवार के साथ सदरपुर, थानगांव, महमूदाबाद समेत कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंच गई। पीड़ित परिवार ने बताया कि डकैत करीब डेढ़ लाख का माल उठा ले गए हैं।
बार्डर पर गांव, पहुंची बाराबंकी की फोर्स
रामपुर मथुरा के छेद्दू पुरवा गांव सीतापुर व बाराबंकी जिले की सीमा पर है। यही वजह रही कि घटना के बाद जब रामपुर मथुरा, थानगांव, सदरपुर थाना व महमूदाबाद कोतवाली की फोर्स गांव में पहुंची तो बाराबंकी के मोहम्मदपुर खाला कोतवाली की पुलिस भी साथ थी।
फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट ने की जांच
घटना के बाद डॉग स्क्वायड व फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट की टीमें गांव पहुंचीं। दोनों टीमों ने काफी देर तक वहां जांच पड़ताल की और साक्ष्य जुटाए।
पांच किलोमीटर की दूरी का सफर आधा घंटे में
छेद्दू पुरवा गांव की दूरी क्षेत्र के बहादुर गंज पुलिस चौकी से करीब 5 किलोमीटर है। जबकि थाने की दूरी 12 किलो मीटर है। रात पौने तीन बजे डकैतों का कहर छेद्दू पुरवा निवासी जनार्दन के घर पर टूटा। हथगोला फेंके जाने से जनार्दन की मौत हो गई, जबकि उसकी पत्नी व एक बच्चा घायल हो गया।
ग्रामीणों ने सूचना पुलिस को दी, लेकिन आधा घंटे के बाद बहादुर गंज पुलिस चौकी के तीन सिपाही घटना स्थल पर पहुंचे। वहीं थानाध्यक्ष जय शंकर सिंह को गांव पहुंचने में एक घंटे से अधिक का समय लग गया। थानाध्यक्ष के वाहन ने ऐसे गंभीर मामले में 12 किलोमीटर का सफर एक घंटे में तय किया। ग्रामीणों का कहना है कि सूचना के तत्काल बाद अगर पुलिस हरकत में आती, तब डकैतों की कांबिंग भी की जा सकती थी।
तीन घंटे के बाद प्राथमिक इलाज
रामपुर मथुरा थाना क्षेत्र के ग्राम छेद्दू पुरवा में जनार्दन के घर रात ढाई बजे डकैतों ने देशी बम फेंके। इसमें जनार्दन की मौत हो गई। जबकि उसकी पत्नी आरती देवी व आकाश घायल हो गए थे। ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी समस्या ये थी कि आखिर इस दहशत भरे माहौल में वे घायलों को अस्पताल कैसे पहुंचाए।
घटना के करीब सवा घंटे के बाद पुलिस गांव पहुंची। पुलिस पहुंचने के बाद भी घायलों को इलाज के लिए नहीं भेजा गया। बल्कि की घटना की लिखा-पढ़ी की गई। इस दौरान करीब 3 घंटे से भी अधिक का समय गुजर गया। इसके बाद पुलिस ने घायल मां आरती देवी व बेटे आकाश को क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा। तब कहीं जाकर घायलों को इलाज मिल सका।
जनार्दन आगे न बढ़ता तो, जाती और भी जानें
डकैतों ने जिस स्थान पर देशी बम फेंके, उस स्थान पर बड़ी घटना हो सकती थी। यह तो जनार्दन की दिलेरी थी, कि उसने मरते दम तक अपने परिवार की रक्षा की। जनार्दन जहां पर लेटा था, वहां करीब ही उसकी पत्नी आरती देवी, पुत्र आकाश, पुत्री कल्याणी व मुस्कान लेटी थीं। डकैतों के हमलावर होते ही जनार्दन परिवार के बीच ढाल बनकर खड़ा हो गया। बदमाशों ने दो बार देशी बम फेंके, दोनों बार ही जनार्दन आगे आ गया और देशी बमों के धमाके अपने शरीर पर झेल लिए। जनार्दन ने खुद जान देकर अपने परिवार की जान बचा ली।
छत पर मौजूद पुत्र सहम गया
जनार्दन परिवार के साथ आंगन में लेटा था। वहीं उसका एक पुत्र अनूप अपने चचेरे भाई शिवम के साथ छत पर लेटा था। आंगन में जब डकैतों ने देशी बम फेंके, तब अनूप इस कदर सहम गया, कि वह जल्दी नीचे ही नहीं उतरा। डकैत उसके सामने ही फायरिंग करते हुए निकल भागे। जब गांव के लोग वहां पहुंचे, तो अनूप व शिवम छत से नीचे उतरे।