बीसीएम नर्सिंग कॉलेज प्रशासन की प्रताड़ना से तंग आकर एक छात्रा ने खुदकुशी की कोशिश की। पहले उसने हाथ की नस काटने का प्रयास किया, छात्राओं ने जब उसे रोक लिया तो रात को उसने नींद की गोलियां खा लीं। तबीयत बिगड़ने पर उसे गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। उधर, यह खबर जब साथी छात्राओं को पता चली तो इन लोगों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। करीब दो घंटे तक प्रदर्शन चला। छात्राओं के परिवारीजन भी पहुंच गए। सिटी मजिस्ट्रेट व पुलिस ने किसी तरह मामलेे को शांत कराया। बाद में कॉलेज प्रबंधन से लिखित समझौता करने के बाद हंगामा थमा।
बरेली के सीबीगंज इलाके के सर्वोदय नगर निवासी छात्रा रक्षंदा राव पुत्री प्रदीप खैराबाद स्थित बीसीएम नर्सिग कॉलेज की तृतीय वर्ष की छात्रा हैं। शुक्रवार देर रात उसने नींद की गोलियां खा लीं। हालत बिगड़ने पर उसे बीसीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में भर्ती छात्रा ने बताया कि कमरे की चाभी खो गई थी। जिसके चलते वार्ड इंचार्ज सिस्टर अमला ने चाभी खो देने का आरोप लगाते हुए कॉलेज से निकाल देने की धमकी दी थी। इस बात को लेकर उसे कई दिनों से प्रताड़ित किया जा रहा था। कॉलेज से निकाले जाने के भय से उसने शुक्रवार को पहले हाथ की नस काटने का प्रयास किया, लेकिन वहां मौजूद छात्राओं ने रोक लिया। इसके बाद रात को उसने कई नशीली गोलियां खा लीं, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई। हालत बिगड़ने पर उसे बीसीएम में ही भर्ती कराया गया। छात्रा के परिवारीजन भी अस्पताल पहुंच गए। उधर, छात्रा की बिगड़ती हालत देख अन्य साथियों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। करीब दो घंटे तक प्रदर्शन चला। सूचना पाकर सिटी मजिस्ट्रेट महेश चंद्र शर्मा व एसओ केके मिश्रा मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्राओं को समझा-बुझाकर किसी तरह शांत कराया। बाद में छात्रा को कॉलेज से न निकाले जाने व कॉलेज प्रशासन द्वारा प्रताड़ित न करने का लिखित समझौता कराने के बाद बवाल थमा।
छात्रा ने ड्यूटी में लापरवाही की थी। जिसके चलते उसे फटकार लगाई गई थी। इससे नाराज होकर उसने ऐसा कदम उठाया है।
सिस्टर प्रवीना, प्रशासिका, बीसीएम
चाय के साथ मिलते गुलगुले
प्रदर्शन कर रहीं छात्राओं ने सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन देकर कॉलेज प्रबंधन पर कई आरोप लगाए हैं। ज्ञापन में कहा गया कि चाय के साथ उन्हें बेजोड़ नाश्ता मिलता है। उन्हें मीठी चाय के साथ मीठे गुलगुले खाने को दिए जाते हैं। जिसे छात्राएं पसंद नहीं करतीं हैं।
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एक कमरे में छह की बजाय 12 छात्राएं रहती
कॉलेज प्रबंधन पर छात्राओं ने आरोप लगाया है कि उनके ठहरने, सोने की समुचित व्यवस्था नहीं है। एक कमरे में जहां सिर्फ अधिक से अधिक छह छात्राएं रह सकती हैं पर एक कमरे में 12 से 14 छात्राओं को ठहरने पर मजबूर किया जाता है।