नैमिषारण्य में कथा सुनाना व सुनना दोनों ही अद्भुत है। यह वह पावन धरा है जहां पर ऋषि, मुनि व देवी और देवता आने को तरसते हैं। यहां पर कथा का अलग ही महत्व है।
बहुत ही पुण्य कर्म करने वालों को ही ऐसा अवसर प्राप्त होता है। यह अमृत वचन मध्य प्रदेश के कथा व्यास महेश गुरु ने हनुमान गढ़ी पर चल रही कथा में कहे।
उन्होंने कहा कि यहां पर कथा का भी एक इतिहास है। सर्व प्रथम इस धरती पर सूत जी ने 88 हजार ऋषि मुनियों को भगवत कथा सुनाई थी। जिसके बाद से इस धरती पर लोग कथा कहने के लिए व्याकुल रहते हैं।
जिसको भी यह अवसर मिल जाता है, वह खुद में धन्य हो जाता है। नैमिषारण्य का इतिहास दर्शाता है कि यह बेहद पावन धरा है। जिसको भी यहां आने का मौका मिला, वह धन्य हो गया।
धरती पर बस यही एक ऐसा क्षेत्र है जहां 33 करोड़ देवी देवता वास करते हैं। प्रतिवर्ष इस धरती पर माथा टेकने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु नैमिषारण्य पहुंचते हैं।