स्कूल और घर के बीच बच्चों को लाते-ले जाते हुए सुरक्षा इंतजामों को लेकर फिर वही लापरवाही और फिर एक मासूम की मौत। टाटा मैजिक में सवार यह मासूम अचानक खिड़की खुल जाने से निकलकर बाहर जा गिरा और पहिये के नीचे आकर कुचल गया। मैजिक के ड्राइवर ने इस हादसे के बाद इतनी भी संवेदना नहीं दिखाई कि घायल बच्चे को अस्पताल ले जाता। गाड़ी में बैठे अन्य बच्चों को वहीं उतारकर वह फरार हो गया।
स्कूल
प्रबंधन और मैजिक के ड्राइवर की लापरवाही से जान गंवाने वाला छह वर्षीय
अमृत पाल गांव सबुआपुर में रहने वाले फार्मर मेजर सिंह का बेटा था और
बिलसंडा के आरएमसीपी एकेडमी स्कूल में नर्सरी में पढ़ता था। बुधवार दोपहर
करीब पौने चार बजे अमृत अन्य बच्चों के साथ रोज की तरह टाटा मैजिक से स्कूल
से घर लौट रहा था।
घर से करीब एक किलोमीटर पहले गांव भूड़ा कस्टुआ के पास
मैजिक की बायीं तरफ की खिड़की अचानक खुल गई। खिड़की के पास बैठा अमृत झटके
से बाहर जा गिरा और मैजिक के पहिये के नीचे आ गया।
घटना के बाद ड्राइवर
ने गाड़ी में बैठे तीन अन्य बच्चों को भी वहीं उतार दिया और मैजिक लेकर भाग
निकला। कुछ देर बाद अमृत के घर वालों को हादसे की खबर मिली तो वे घटनास्थल
पर पहुंचे और लहूलुहान अमृत को उठाकर नगर के एक अस्पताल में लाए लेकिन
डॉक्टरों ने अमृत को मृत घोषित कर दिया।
परिवार के लोग इसके बाद उसका शव
अपने फार्म हाउस पर ले आए और पुलिस को सूचना दी। समाचार लिखे जाने तक घटना
की रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई थी। लोगों में इस घटना से स्कूल प्रबंधन के खिलाफ
काफी गुस्सा दिखाई दिया।
000
स्कूल प्रबंधन की अनदेखी के
वजह से यह हादसा हुआ है। मृतक छात्र के परिजनों की ओर से तहरीर मिलते ही
रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
- राजेश यादव एसओ बिलसंडा
मासूम की दर्दनाक मौत ने हर दिल को झकझोरा
बिलसंडा। छात्र अमृतपाल की स्कूल की मैजिक से कुचल कर हुई मौत की घटना ने हर किसी के दिल को झकझोर कर रख दिया। घटना की खबर जैसे ही फैली, लोग फार्म हाउस (घर) की ओर दौड़ पड़े। लोगों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उनका कहना था कि न तो प्रशासन और न ही स्कूल प्रबंधन ने पूर्व की घटनाओं से कोई सबक लिया। वाहन में अगर हेल्पर या गार्ड होता तो शायद घटना टल सकती थी।
नौ अप्रैल को नगर के संजीव अग्रवाल के पुत्र ध्रु्व की मकसूदापुर स्थित बजाज पब्लिक स्कूल की बस के फर्श से नीचे गिरकर पहिया से कुचल जाने से दर्दनाक मौत हो गईं थी। घटना के विरोध में समूचा बाजार बंद रहा था। परिवहन विभाग ने खटारा स्कूल वाहनों पर शिकंजा कसने के लिए सघन चेकिंग भी कराई थी, जिसमें आरएमसीपी एकेडमी की इसी मैजिक को पुलिस ने पकड़ा भी था। हालांकि बाद मेें वह कोर्ट से रिलीज हो गई थी। बताते हैं कि अगर उस घटना से स्कूल संचालकों ने सबक लिया होता तो शायद आज मासूम छात्र अमृतपाल की जान न जाती। बता दें कि इस स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को लाने और ले जाने के लिए जो मैजिक किराए पर ले रखी हैं। उसकी हालत काफी जर्जर है।
बच्चे की मौत ने सूना कर दिया आंगन
बच्चे की मौत के बाद माता-पिता का बुरा हाल हो गया। बेटे के शव पर विलाप करते हुए मां परमजीत कौर यही कहे जा रही थी कि उसके लाल ने किसी का क्या बिगाड़ा, जो ऊपर वाले ने इतनी बड़ी सजा दे दी। बता दें कि मेजर सिंह के दो बच्चे थे, जिनमें बेटी की पांच वर्ष पूर्व बीमारी के चलते मौत हो गई थी। अब केवल अमृतपाल ही उसका सहारा था, जो आज हादसे का शिकार हो गया। इतना ही नहीं मासूम की पर वहां हर किसी की आंख से आंसू गिर रहे थे। जैसे ही लोगों को हादसे की खबर लगी मेजर के फार्म हाउस की ओर दौड़ पड़े। लोग स्कूल प्रबंधन की लापरवाही पर आक्रोश व्यक्त कर रहे थे। यह भी चर्चा रही कि जिस वाहन से बच्चे की मौत हुई, वह इसी गांव का था।
खटारा वाहनों से ढोए जाते हैं बच्चे
स्कूल संचालक अभिभावकों से बच्चों को लाने और पहुंचाने के नाम पर शुल्क तो मनमाना वसूलते हैं, लेकिन सुविधाओं पर ध्यान नहीं देते हैं। नगर के कई ऐसे स्कूल हैं, जिन्होंने बच्चों को लाने और पहुंचाने के लिए वैन और मैजिक की व्यवस्था कर रखी है, लेकिन उनकी भी दशा न केवल बदतर है बल्कि कई वैन तो ऐसी हैं जो अक्सर खटारा होने के कारण रास्ते में खड़ी हो जाती हैं। लेकिन प्रशासन की अनदेखी के चलते स्कूल संचालक मनमानी पर उतारू हैं।
हादसे पर सभी दुखी
स्कूल प्रबंधक नरेंद्र मोहन सक्सेना ने बताया कि उन्होंने किराए पर मैजिक स्कूल में लगा रखी थी। रोज की तरह चालक बच्चों को छोडने जा रहा था। रास्ते में हादसा हो गया, जिसका सभी को दुख है।