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जहरीली शराब से यहां भी जा चुकी हैं कई जानें

Sat, 08 Jul 2017 11:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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जहरीली शराब से यहां भी जा चुकी हैं कई जानें
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घटना के बाद चेतता है आबकारी विभाग 
सीतापुर। शराब के अवैध कारोबार की सच्चाई बयां करने के लिए ये तीन मामले महज बानगी भर हैं। जिले के भूड़ इलाके, गोमती क कछारों से लेकर बहराइच, बाराबंकी की सीमा को छूने वाली जिले में तराई बेल्ट तक कच्ची शराब का अवैध कारोबार एक उद्योग का रूप ले चुका है। जिले में बनी कच्ची शराब की सप्लाई राजधानी लखनऊ तक की जाती है। पुलिस व आबकारी विभाग के मिलीभगत से अवैध कारोबार तेजी से फलफूल रहा है। औपचारिकता के नाम पर कभी-कभार विभागीय जिम्मेदार छापेमारी करते हैं। उन्हें शायद इंतजार रहता है। सूत्र बताते हैं कि जिले के 25 थाना क्षेत्रों में कच्ची शराब का कारोबार हो रहा है। जानकार बताते हैं कि जिले के पिसावां, मिश्रिख, संदना, सिधौली, अटरिया, महोली, इमलिया सुल्तानपुर, तंबौर, रामपुर मथुरा, रेउसा, रामपुर कलां आदि क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर लोग ग्रामीण क्षेत्रों में कच्ची शराब बनाते हैं।  
चुनाव आयोग की सख्ती पर ही झुकता आबकारी विभाग 
अवैध शराब पर पाबंदी को लेकर लापरवाह आबकारी विभाग के तेवर हमेशा ठंडे रहते हैं। वह अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलाने के बजाय दूसरे कामों में ज्यादा मशगूल रहता है। बस चुनाव के वक्त आयोग के सख्त निर्देशों की वजह से ही चंद दिन आबकारी विभाग सक्रिय नजर आता है। चुनाव खत्म होने के बाद अपनी आंकड़ेबाजी पेश विभाग फिर से अवैध शराब कारोबार की ओर से आंखें बंद कर लेता है। उसकी नींद टूटती है, तब जब कोई हाईकमान से अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलाने का निर्देश मिलता है। सूत्र बताते हैं कि विधानसभा चुनाव के वक्त आबकारी विभाग ने पुलिस की मदद से जिले में छह हजार 622 लीटर कच्ची शराब बरामद की थी। लगभग चार सौ मुकदमे लिखे गए थे। जिनमें करीब चार सौ 28 लोगों पर कार्रवाई हुई थी। आबकारी विभाग ने स्वयं कार्रवाई करते हुए चुनाव के दरम्यान 579 केस दर्ज किए थे। नौ हजार 32 लीटर कच्ची शराब बरामद की गई थी। 10 हजार क्विंटल से अधिक लहन नष्ट की गई थी।  
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केस एक
रामपुर मथुरा इलाके के गोंडा देवरिया गांव में 2016 में रामलखन की जहरीली शराब पीने से मौत हो गई थी। शुरुआत में पुलिस व आबकारी विभाग ने कार्रवाई का दिखावा किया, लेकिन समय के साथ सब ठंडे पड़ गए। गांव में शराब का अवैध कारोबार जारी है।
केस दो 
गोंडा देवरिया गांव के ही निवासी देव नारायन सिंह की लगभग दो साल पूर्व जहरीली शराब पीने से मौत हो गई थी। इस मामले में भी कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। पूरे क्षेत्र में शराब का अवैध कारोबार चरम पर है।

केस तीन
रामपुर मथुरा इलाके के गोंडा देवरिया गांव में ही जहरीली शराब पीने से मौत का तीसरा मामला प्रकाश में आया था। यहां के योगेंद्र के परिवारीजन ने आरोप लगाया था कि योगेंद्र की मौत जहरीली शराब पीने से हुई है, लेकिन बाद में यह मामला भी ठंडा पड़ गया था।  

पुलिस पर भी कार्रवाई न करने के डाले जाते दबाव
पुलिस सूत्रों की माने तो आबकारी विभाग कच्ची शराब बनाने व बेंचे जाने पर स्वयं पाबंदी लगाना नहीं चाहती। पुलिस टीम ने कई बार लगातार छापेमारी कर अवैध शराब बरामद की तो आबकारी विभाग के कुछ जिम्मेदार पुलिस को मैनेज  करने में जुट जाते हैं। 
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चलाएंगे अभियान
अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलाने का निर्देश मिला है। सदर तहसील क्षेत्र में कई जगह पुलिस टीमों के साथ विभागीय लोगों ने छापेमारी की है। छापेमारी में गिरफ्तारी व बरामदगी की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जिले में कच्ची शराब किसी भी हाल में बनने नहीं दी जाएगी। अभियान चलाया जाएगा। 
सुनील दुबे, जिला आबकारी अधिकारी
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