महमूदाबाद कोतवाली में युवती की संदिग्ध हालात में फांसी लगाने से हुई मौत के बाद भड़के बवाल का खौफ बुधवार को भी रहा। पुलिस के सख्त पहरे व नाकेबंदी के चलते अघोषित कर्फ्यू जैसा माहौल रहा।
दुकानें व स्कूल-कॉलेज बंद रहे। संगीनों के साए में लोग दूध और दवा तक के लिए तरस गए। मार्निंग वॉक करने वाले घरों में ही दुबके रहे। जो निकला, उसे पुलिस की लाठियां खानी पड़ीं। तनावपूर्ण शांति रहने से लोग डरे हुए हैं।
सोमवार सुबह महमूदाबाद कोतवाली के टॉयलेट में कस्बा निवासी जीनत की लाश फंदे से लटकती मिली थी। घटना से नाराज लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस व पब्लिक के बीच हुए संघर्ष के दौरान फायरिंग में नदीम पुत्र सलीम की गोली लगने से मौत हो गई थी।
हादसे के बाद आईजी जोन, डीएम, एसपी के अलावा कई जिलों की पुलिस, पीएसी व रैपिड एक्शन फोर्स लगा दी गई थी। क्षेत्र में तनाव को देखते हुए मंगलवार सुबह से ही पुलिस ने पूरे कस्बे की नाकेबंदी कर दी थी। मुख्य मार्ग के अलावा सारे रास्तों पर बैरीकेडिंग कर पुलिस का पहरा बैठा दिया गया।
मार्निंग वॉक के लिए निकले लोगों को भी घरों को वापस कर दिया गया। बस स्टेशन के पास मार्निंग वॉक को निकले एक व्यक्ति की पुलिस कर्मियों ने पिटाई कर दी। पुलिस की नाकेबंदी के चलते कस्बे में कर्फ्यू जैसा माहौल रहा।
इससे डरे ग्रामीण क्षेत्रों से दूधिया कस्बे में नहीं गए। लोग दूध को तरस गए। दवा की दुकानें बंद रहीं। दुकानें पूरी तरह से बंद रहने से जरूरत का सामान लेने के लिए भी लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। दोपहर की नमाज के बाद बवाल में मारे गए नदीम के शव का अंतिम संस्कार के बाद माहौल कुछ हल्का हुआ।
कुछ दुकानें खुलीं लेकिन लोग खरीदारी नहीं कर पाए। कस्बे में अभी भी तनाव की स्थिति है। हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि हालात अब सामान्य हैं। बुधवार को शिक्षण संस्थान खुलेंगे।