बिसवां क्षेत्र के रामाभारी गांव के निकट बुधवार को तेंदुआ दिखने से हड़कंप मच गया। सूचना पाकर मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने जब कॉम्बिंग की, तो तेंदुए ने एक वनकर्मी पर हमला बोल दिया।
हालांकि वनकर्मी मामूली रूप से जख्मी हुआ है। इस दौरान तेंदुआ करीब के एक ईंट-भट्ठे के चेंबर में घुस गया। सूचना के बाद लखनऊ से पहुंची टीम ने चेंबर के मुहाने पर पिंजड़ा लगा दिया है। खबर लिखे जाने तक तेंदुआ पकड़ में नहीं आ सका था। इस वजह से ग्रामीणों में दहशत बरकरार है।
लोग अपने परिवार की चिंता में रतजगा कर रहे हैं। बिसवां के ग्राम रामाभारी निवासी संतोष कुमार बुधवार सुबह करीब 8 बजे गांव में गेहूं की फसल की सिंचाई कर रहा था। इसी दौरान रिजवान के गन्ने के खेत से एकाएक तेंदुआ बाहर निकल आया। आसपास के खेतों में लोगों की हलचल देख वह वापस खेत में घुस गया।
इस पर ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दी। करीब एक घंटे के भीतर ही टीम मौके पर पहुंच गई और उसकी खोजबीन शुरू कर दी। इसी बीच तेंदुआ फिर से खेत से बाहर आया पास में ही खड़े फारेस्ट गार्ड रामहेत पर पंजे से हमला कर जख्मी कर दिया और चकमा देकर करीब के ही ईंट-भट्ठे के चैंबर में घुस गया।
इसके बाद वन विभाग की टीम ने लखनऊ चिड़ियाघर से मदद मांगी और ईंट-भट्ठे के सभी मुहानों को चौपहिया वाहन लगाकर बंद कर दिया गया है। डीएफओ एपी त्रिपाठी का कहना है कि लखनऊ से आए पिंजड़े में बकरी को बांधा जाएगा। तेंदुआ जैसे ही चैंबर से बाहर आएगा, वह पिंजड़े में कैद हो जाएगा।
न विशेषज्ञ हैं न ही पर्याप्त संसाधन
वन्यजीवों को काबू करने के मामले में यहां वन विभाग के पास न तो एक्सपर्ट मौजूद हैं और न ही इनके पास ऐसे संसाधन हैं, जिससे वे जंगली जानवरों को काबू में कर सकें। यहां हर बार जंगली जानवर सामने आने पर वन विभाग लखनऊ से मदद मांगता नजर आया है।
कुल मिलाकर जानवरों को काबू करने के मामले में यहां का वन विभाग लखनऊ वन्य प्राणि उद्यान पर ही निर्भर है। बाघ व तेंदुआ दिखने पर यहां का विभाग लखनऊ से मदद आने का इंतजार करता रहता है।
नदी व तालाब का क्षेत्र अनुकूल
जानकारों का कहना है कि जानवर ऐसे स्थान को अपने निवास के लिए चुनते हैं, जहां उन्हें शिकार आसानी से मिल जाए। वहीं उन्हें पीने के पानी की भी दिक्कत न हो। इसकी दो वजह हैं, पहली वजह यह है कि बाघ, तेंदुआ, चीता आदि खूंखार जानवर पानी के करीब घात लगाकर बैठ जाते हैं।
अन्य जीव प्यास लगने पर जैसे ही तालाब व नदी के तट पर पहुंचते हैं, ये खूंखार जानवर उन पर हमला कर अपना शिकार बना लेते हैं। उन्हें शिकार आसानी से मिल जाता है। दूसरी वजह यह है कि वे उसी पानी से अपनी प्यास भी बुझाते रहते हैं।
नदी के रास्ते बढ़ते हैं आगे
खूंखार जानवर नदी के तट को रास्ते के रूप में इस्तेमाल करतेे हैं। ये जानवर शारदा नदी के किनारे किनारे आगे का रास्ता तय करते हुए सीतापुर में प्रवेश कर रहे हैं। बिसवां क्षेत्र में आया तेंदुआ भी शारदा नदी के रास्ते ही आया होगा।