सीतापुर। तत्कालीन जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) तुलसीराम विश्वकर्मा के खिलाफ शासन ने जांच के निर्देश दिए थे। इस पर सतर्कता अधिष्ठान ने जांच शुरू कर दी है।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत विभिन्न कार्यक्रमों में अनियमितता बरतने, शासकीय धन के दुरुपयोग मामले पर जांच की जा रही है।
इसे लेकर सतर्कता अधिष्ठान के अपर पुलिस अधीक्षक ने सीडीओ से दस्तावेज जांच अफसर को उपलब्ध कराने को है। जिले में प्रभारी डीपीआरओ के पद पर तुलसीराम विश्वकर्मा चार अप्रैल 2018 से आठ मार्च 2019 तक कार्यरत रहे।
इस दौरान शौचालय निर्माण की धनराशि का जिम्मेदारों ने बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया। अन्त्येष्टि स्थल के निर्माण के लिए शासन से भेजी गई धनराशि का भी दुरुपयोग किया गया।
वित्तीय अनियमितता बरतने के प्रकरणों में प्रधानों के विरुद्ध डीएम के निर्देश पर हुई जांचों को लंबित रखा गया। राज्य वित्त एवं चौदहवेें वित्त की धनराशि के गबन के मामलों में भी कार्रवाई न करने समेत अन्य आरोपों के आधार पर तुलसीराम को जिले से हटाकर पंचायत राज निदेशालय संबद्ध किया गया था।
इनके खिलाफ जिला प्रशासन ने भी रिपोर्ट भेजी थी। इसके अतिरिक्त इनके विरुद्ध अन्य स्रोतों से भी शासन में शिकायतें की गई। इन शिकायतों का संज्ञान लेते सतर्कता अधिष्ठान ने इनके विरुद्ध जांच प्रारंभ की है।
यह जांच निरीक्षक जगराम कुशवाहा को सौंपी गई है। इन्हें जांच से संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने के लिए अपर पुलिस अधीक्षक उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान सीआई सेक्टर लखनऊ ने सीडीओ को पत्र भेजा है। इसके मार्फत 11 बिन्दुओं से संबंधित अभिलेख मांगें गए हैं।
पूर्व में ही डीएम ने जिला विकास अधिकारी को नोडल अधिकारी नामित किया है। सतर्कता अधिष्ठान के जांच अफसर को डीपीआरओ दफ्तर से संबंधित अभिलेख प्राप्त कर उपलब्ध कराने के निर्देश डीडीओ को दिए हैं।
-संदीप कुमार, मुख्य विकास अधिकारी