सीतापुर। पोषक तत्वों से भरपूर करौंदा की फसल न सिर्फ किसानों के लिए आमदनी का अच्छा जरिया है, बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार करौंदा कम लागत वाली और कम देखभाल वाली फसल है, जिसे घर की बाड़ी से लेकर बड़े बाग तक में आसानी से लगाया जा सकता है। एक बार पौधा लगाने के बाद कई वर्ष तक इससे फल प्राप्त किए जा सकते हैं।
उद्यान निरीक्षक राजीव गुप्ता ने बताया कि करौंदा का पौधा गर्म और शुष्क जलवायु में अच्छी तरह पनपता है। इसकी खेती के लिए ज्यादा पानी या उर्वरक की जरूरत नहीं होती। बंजर और कम उपजाऊ जमीन में भी यह सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। जून से सितंबर तक करौंदा के पौधे लगाने का सबसे उपयुक्त समय है। इसे बीज और कलम दोनों तरीकों से लगाया जा सकता है। कलम से लगाए गए पौधे जल्दी फल देना शुरू कर देते हैं। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे परंपरागत फसलों के साथ-साथ करौंदा जैसी बागवानी फसलों को भी अपनाएं। इससे एक तरफ जमीन का बेहतर उपयोग होगा, वहीं दूसरी तरफ पोषण सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
पाचन तंत्र को रखता है दुरुस्त
विशेषज्ञों के मुताबिक करौंदा में विटामिन सी, आयरन और कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और खून की कमी दूर करने में सहायक है। करौंदे का उपयोग अचार, चटनी, जैम और दवाओं में भी किया जाता है। बाजार में इसकी लगातार मांग बनी रहती है, जिससे किसानों को अच्छा दाम मिलता है।
निशुल्क मिलेगा पौधा
उद्यान निरीक्षक राजीव गुप्ता ने बताया कि करौंदे का पौधा उद्यान विभाग की नर्सरी से किसानों को निशुल्क उपलब्ध है।